
दिल्ली डायरी प्रवेश कुमार मिश्र। चुनावी रणनीतिकार व जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में हो रहे उपचुनाव में बतौर उम्मीदवार उतरकर सबको चौंका दिया है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद खाली हुए इस सीट को भाजपा का गढ़ माना जाता है. चर्चा है कि पीके ने सोची समझी रणनीति के तहत राजधानी पटना के सबसे पढे लिखे मतदाताओं के बीच उतरकर न सिर्फ भाजपाई रणनीतिकारों के माथे पर पसीना ला दिया है बल्कि भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए दूर का संदेश देने का प्रयास किया है.
यदि वे इस समर से विजयी होकर लौटते हैं तो इससे भाजपा को कड़ा झटका लगेगा और इसका सीधा असर राष्ट्रीय राजनीति के समीकरण पर पड़ेगा. क्योकि इस समय जनसुराज यानी पीके की पार्टी के पास खोने के लिए कुछ नहीं है. इसलिए भाजपाई रणनीतिकार इस चुनौती को हल्के में नहीं ले रहे हैं बल्कि एक विधानसभा के लिए नेताओं की बड़ी टीम उतारने को लेकर दिल्ली में रणनीति बनाई जा रही है. मध्यप्रदेश कांग्रेस के अंतर्कलह पर हाई कमान की नजर मध्यप्रदेश कांग्रेस में आरंभ हुआ शीतयुद्ध सुलझने के बजाय उलझने लगा है. प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बीच मुद्दा विशेष को लेकर सामने आया मतांतर गुटबाजी का स्वरूप लेने लगा है.
हालांकि दोनों पक्षों की ओर से सबकुछ ठीक होने का दावा किया जा रहा है लेकिन अंदरखाने वरिष्ठ नेताओं बनाम युवा का अंतर्द्वंद्व धीरे धीरे सुलग रहा है. ऐसा नहीं है कि इस तरह की राजनीतिक हलचल से पार्टी का केन्द्रीय नेतृत्व बेखबर है. बल्कि पार्टी हाईकमान इस मुद्दे पर पैनी नजर लगाए हुए है. अभी तक संकेतों के माध्यम से संदेश दिया जा रहा है लेकिन चर्चा है कि जल्द ही पार्टी रणनीतिकार किसी वरिष्ठतम नेता को भोपाल भेजकर इसे सुलझाने का प्रयास करेंगे. राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर सीधे बोलने से बच रहे हैं भाजपाई
अयोध्या राम मंदिर चढ़ाव चोरी मामले में जहां एक तरफ पुलिस और एसआईटी की जांच कानूनी तथ्यों के साथ आगे बढ़ रही है वहीं दूसरी ओर ट्रस्ट द्वारा चंपत राय व अनील मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर व्यवस्था को दुरूस्त करने का प्रयास किया जा रहा है. लेकिन इन सबके बीच संघ की ओर से नपे-तुले शब्दों में बयान आने के बाद भी भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं द्वारा सीधे तौर पर इस प्रकरण से दूरी बनाना चर्चा का विषय बना हुआ है. राजनीतिक हल्कों में चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत वरिष्ठ मंत्री व भाजपा के वरिष्ठतम नेताओं ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत खुलकर बोलने से परहेज़ किया है. चर्चा है कि संसद के मानसून सत्र के पहले राज्य सरकार द्वारा बनाई गई एसआईटी व पुलिस जांच का ज्यादातर हिस्सा सार्वजनिक हो जाएगा. उसके बाद यदि जरूरत पड़ी तो सरकार अपना रूख स्पष्ट करेगी.
पंजाब में आप को घेरने में जुटे कांग्रेसी व भाजपाई पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को कड़ी चुनौती देने के उद्देश्य से कांग्रेस पार्टी ने जहां एक तरफ वरिष्ठ नेताओं को एकजुट रखने के प्रयास के तहत एक बड़ी कमेटी की घोषणा कर दी है वहीं दूसरी ओर नाराज़ नेताओं को मनाने कर पुनर्वापसी कराने का प्रयास तेज कर दिया गया है. जबकि भाजपाई रणनीतिकारों ने पंजाब फतह के लिए सबसे पहले स्थानीय समीकरणों को साधते हुए विभिन्न दलों के नाराज वरिष्ठ नेताओं को जोड़ने का प्रयास आरंभ किया है. इतना ही नहीं भाजपाई रणनीतिकार अपने पूर्व सहयोगी अकाली दल से भी चुनावी गठबंधन की बातचीत कर रहे हैं. यानी आम आदमी पार्टी को चुनावी शिकस्त देते हुए सत्ता से बेदखल करने के लिए कांग्रेस व भाजपा विशेष रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं. जबकि आप अपने कुनबे को बचाने के लिए मशक्कत कर रही है.
