मुंबई, भारतीय शेयर बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) और विदेशी वेंचर कैपिटल निवेशकों (FVCI) के लिए नियमों में ऐतिहासिक संशोधन किया है। अब इन निवेशकों को अपनी रजिस्ट्रेशन और कंटिन्यूएशन फीस अमेरिकी डॉलर के बजाय भारतीय रुपये में चुकानी होगी। यह नई व्यवस्था अगले छह महीनों के भीतर लागू कर दी जाएगी, ताकि संबंधित संस्थाओं और एजेंटों को इस बदलाव के साथ तालमेल बिठाने का पर्याप्त समय मिल सके।
सुधार के पीछे की व्यावहारिक वजहें
इस निर्णय के पीछे का मुख्य कारण डॉलर में भुगतान के दौरान आने वाली व्यावहारिक जटिलताएं हैं। अब तक विदेशी मुद्रा के रूपांतरण, बैंक शुल्क और विनिमय दर में उतार-चढ़ाव के कारण सेबी को सटीक वित्तीय हिसाब-किताब रखने में कठिनाई होती थी और मैन्युअल प्रक्रिया के चलते रिपोर्टिंग में देरी होती थी। रुपये में फीस तय होने से अब पारदर्शिता बढ़ेगी और नियामक को भुगतान का सटीक डेटा तत्काल उपलब्ध हो सकेगा, जिससे वित्तीय प्रक्रियाओं में सुगमता आएगी।
पैन कार्ड प्रक्रिया और निवेश का सरलीकरण
फीस के नियमों के साथ-साथ सेबी ने विदेशी निवेशकों के लिए रजिस्ट्रेशन फॉर्म को भी अधिक सरल बना दिया है। अब फॉर्म में जन्मतिथि या कंपनी के पंजीकरण की तारीख का उल्लेख अनिवार्य होगा, जो केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। इस बदलाव से विदेशी निवेशकों के लिए पैन कार्ड प्राप्त करने की प्रक्रिया तेज और आसान हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुधारों से भारत में विदेशी निवेश (FPI) के आने की प्रक्रिया और अधिक सरल व आकर्षक बनेगी।

