ग्वालियर: मानसून की सक्रियता के बीच ग्वालियर संभाग में जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। संभाग के प्रमुख बांधों की निगरानी करने वाला विभाग पिछले एक माह से कार्यपालन यंत्री के बिना संचालित हो रहा है। ऐसे समय में जब बारिश का दौर तेज हो रहा है और किसी भी समय बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं, विभाग में नेतृत्व का अभाव प्रशासनिक चिंता का विषय बन गया है।ग्वालियर संभाग के प्रमुख तिघरा, हरसी और केकटो बांध की सुरक्षा, जलस्तर की निगरानी, नहरों के रखरखाव और बाढ़ नियंत्रण की जिम्मेदारी जिस कार्यपालन यंत्री पर होती है, वह पद करीब एक माह से रिक्त पड़ा है। इसके चलते विभाग की नियमित मॉनीटरिंग और रखरखाव प्रभावित हो रहा है।
हाल ही में संभागायुक्त ने बाढ़ और अतिवृष्टि से निपटने की तैयारियों को लेकर सभी संबंधित विभागों की बैठक ली थी। बैठक में जल संसाधन विभाग को बांधों के जलस्तर की सतत निगरानी, समय पर पानी छोड़ने की सूचना देने, निचले क्षेत्रों को अलर्ट करने तथा राहत एवं बचाव एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे हालांकि विभाग में वरिष्ठ अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बांधों की निगरानी और नहरों का रखरखाव प्रभावित
सूत्रों के अनुसार ग्वालियर संभाग के कई बांधों की नहरों में जगह-जगह क्षति पहुंची है। समय पर मरम्मत और नियमित मेंटेनेंस नहीं होने से सिंचाई व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। कई स्थानों पर नहरों के किनारे कटाव और रिसाव की शिकायतें भी सामने आई हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी नहीं होने से निर्णय प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान बांधों की सुरक्षा केवल जलस्तर तक सीमित नहीं होती, बल्कि स्पिलवे, गेट, नहरों और तटबंधों की लगातार निगरानी भी उतनी ही आवश्यक होती है।
