खामेनेई के जनाजे में ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ और ‘इजरायल मुर्दाबाद’ के लगे नारे, हजारों लोग तेहरान की सड़कों पर उमड़े

तेहरान, 06 जुलाई (वार्ता) ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई का जनाजा सोमवार को जब राजधानी से होकर गुजरा तो तेहरान की सड़कों पर शोक संतप्त हजारों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।

इस दौरान अमेरिका-इजरायल से बदला लेने के नारे गूंजते रहे।

श्री खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्यों के पार्थिव शरीर वाले ताबूतों को तेहरान के लगभग 10 किलोमीटर लंबे रास्ते से धीरे-धीरे ले जाया गया। ये सभी ईरान युद्ध के शुरुआती हमलों में मारे गये थे। शवयात्रा ‘मैदाने इंकलाब’ से होकर गुजरी, जहां चौराहे पर बने विशाल ‘भींचे हुए मुक्के’ के स्मारक के नीचे भारी भीड़ जमा थी। यह स्मारक इस्लामिक गणराज्य के प्रतिरोध का प्रतीक माना जाता है।

आईआरजीसी से जुड़ी समाचार एजेंसी ‘फार्स न्यूज’ ने कहा, “बदले के लाल झंडे थामे हर कोई यहां आया है।” शिया परंपरा में बदले का प्रतीक माने जाने वाले लाल झंडे पूरी भीड़ में दिखाई दे रहे थे। इसके साथ ही वहां ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ और ‘इजरायल मुर्दाबाद’ लिखे बड़े-बड़े बैनर भी भारी संख्या में लहरा रहे थे।

शवयात्रा में शामिल कई लोगों ने अमेरिका विरोधी नारे लगाये, जिनमें ‘हमें कोई समझौता नहीं चाहिए, हमें ट्रंप का सिर चाहिए’ जैसे नारे शामिल थे। इस दौरान कुछ शोकग्रस्त लोगों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टरों पर पत्थर फेंकते भी देखा गया। रिपोर्टों के अनुसार, जुलूस के दौरान श्री ट्रंप का पुतला भी प्रदर्शित किया गया और उसे फांसी पर लटकाया गया।

भीड़ के बीच ले जाये जा रहे बड़े बैनरों पर ‘ट्रंप को मारो – 100 मिलियन डॉलर का ईरानी इनाम’ जैसे संदेश लिखे थे। वहीं एक अन्य पोस्टर में श्री ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को ‘वांछित’ अपराधियों के रूप में दिखाया गया था, जिसमें उनकी तस्वीरों पर बंदूक के निशाने बने थे और साथ ही अंग्रेजी में ‘खून बहेगा’ और ‘ट्रंप की हत्या करो’ जैसे नारे लिखे हुए थे।

जनाजे में शामिल ईरानी अधिकारियों ने भी जवाबी कार्रवाई की मांग दोहरायी। ईरान की सुप्रीम काउंसिल ऑफ साइबरस्पेस के सदस्य और सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के पूर्व प्रमुख इज्जतुल्लाह जरगामी ने कहा कि अमेरिका से बातचीत सिर्फ मजबूरी में की जा रही थी। उन्होंने कहा, “हमारा पहला लफ्ज बदला है।”

श्री जरगामी ने कहा कि किसी भी जवाबी कार्रवाई से ‘दुश्मनों को सबक मिलना चाहिए’ और श्री खामेनेई की हत्या को लेकर जनता के गुस्से का इंसाफ होना चाहिए। उन्होंने दलील दी कि ‘जबरदस्त, दो-टूक और फैसलाकुन बदले’ से कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं होगा।

जबरदस्त भीड़ के बावजूद हालांकि इस पूरे कार्यक्रम से ईरान के वर्तमान सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई की अनुपस्थिति काफी चर्चा में रही, जिन्हें उनके पिता और श्री खामेनेई परिवार के अन्य सदस्यों की मौत के बाद 28 फरवरी से नहीं देखा गया है।

इजरायली अधिकारियों ने पहले ही संकेत दे दिये थे कि मोजतबा खामेनेई को भी लक्ष्य पर रखा जायेगा। इसी वजह से वे यहां अनुपस्थित रहे, क्योंकि खबरों के मुताबिक ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने सर्वोच्च नेता को अपने पूर्ववर्ती के जनाजे में शामिल होने से रोक दिया था।

सर्वोच्च नेता का पद संभालने के बाद से ही श्री मोजतबा खामेनेई को न तो कहीं देखा गया है और न ही सुना गया है। उन्होंने केवल ईरानी मीडिया पर प्रकाशित लिखित बयानों के जरिए ही संवाद किया है।

अंतिम संस्कार के इन कार्यक्रमों में उस हमले में मारे गये श्री खामेनेई परिवार के अन्य सदस्यों को भी याद किया गया, जिनमें श्री मोजतबा खामेनेई की पत्नी जहरा हद्दाद-आदेल भी शामिल थीं।

इस समारोह में कई देशों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ-साथ ईरान के क्षेत्रीय सहयोगियों और उससे जुड़े गुटों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की। ईरान की कई जानी-मानी राजनीतिक हस्तियां, जिनमें कई पूर्व राष्ट्रपति शामिल हैं, हालांकि अंतिम संस्कार की इस पूरी कार्यवाही में वे कहीं नजर नहीं आये।

 

 

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