
इंदौर. शहर के दो बिल्डरों से लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर रंगदारी मांगने के मामले की जांच अब मध्यप्रदेश में फैले हथियार सप्लाई नेटवर्क तक पहुंच गई है. क्राइम ब्रांच सूत्रों ने बताया कि पूछताछ में खुलासा हुआ है कि गैंग के गुर्गे कसरावद के एक सिकलीगर से देसी पिस्टल खरीदते ही नहीं थे, बल्कि खराब होने पर वहीं उन्हें सुधारने भी ले जाते थे. जांच जब उस सिकलीगर तक पहुंची तो पता चला कि वह खरगोन के चर्चित कॉटन व्यापारी फायरिंग कांड में सरकारी गवाह बन चुका है. अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है.
क्राइम ब्रांच ने हाल ही में रंगदारी मामले में गिरफ्तार गैंग के गुर्गों को एक साथ रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी. पूछताछ में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी राजपाल चंद्रावत और कुलदीप कई बार कसरावद के उस सिकलीगर के संपर्क में रहे, जहां से हथियारों की खरीदी और मरम्मत कराई जाती थी. इसके बाद जब जांच टीम वहां पहुंची तो जानकारी मिली कि संबंधित सिकलीगर पहले से खरगोन पुलिस की जांच में शामिल है और कॉटन व्यापारी के घर के बाहर हुई फायरिंग के मामले में उसे सरकारी गवाह बनाया जा चुका है. जांच में एक और अहम कड़ी रतलाम का एक माली सामने आया है. सूत्रों का कहना है कि इसी व्यक्ति ने गैंग के गुर्गों की सिकलीगर से पहचान कराई थी. यही माली खरगोन के गोलीकांड में आरोपी है और इंदौर के रंगदारी मामले में भी उसकी भूमिका सामने आने के बाद उसकी तलाश तेज कर दी गई है, फिलहाल वह फरार है. क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के जरिए गैंग तक हथियार किस तरह पहुंच रहे थे और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही है. पुलिस फरार आरोपियों की तलाश के साथ पूरे हथियार सप्लाई नेटवर्क की जांच कर रही है.
जांच आगे बढ़ाई जा रही है…
आरोपियों की पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर हथियार उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क की जांच आगे बढ़ाई जा रही है. फरार आरोपियों और उनसे जुड़े लोगों की तलाश की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद इस मामले में और कार्रवाई की जाएगी.
राजेश दंडोतिया, एडीसीपी क्राइम
