नयी दिल्ली 06 जुलाई (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को देश की एकता और अखंडता के लिए समर्पित दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा है कि उनके विचार आज भी देश की प्रगति में मार्गदर्शक बने हुए हैं।
इंडोनेशिया की यात्रा पर गए श्री मोदी ने डॉ मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर सोमवार को वीडियो संदेश के माध्यम से एक कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पूर्व निर्धारित यात्रा कार्यक्रम के कारण वह इस आयोजन में शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन तकनीक की मदद से इस आयोजन से जुड़ सके हैं।
उन्होंने डॉ. मुखर्जी को भारत की एकता और अखंडता के लिए समर्पित दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि उनके विचार आज भी देश की प्रगति का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार डॉ. मुखर्जी की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में दो वर्षीय राष्ट्रीय समारोह मना रही है और यह कार्यक्रम उनकी विरासत को सम्मान देने का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री ने 1947 की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि डॉ. मुखर्जी ने पूरे बंगाल को भारत से अलग करने के प्रयासों का विरोध किया और राज्य के भारत में बने रहने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने दो संविधान, दो प्रधानमंत्री और दो झंडों की व्यवस्था का भी विरोध किया था तथा उनकी सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाकर उनके सपने को साकार किया है।
डॉ. मुखर्जी के शिक्षा और उद्योग के क्षेत्र में योगदान का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह भारतीय मूल्यों और मातृभाषाओं पर आधारित शिक्षा के पक्षधर थे। उन्होंने चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स, सिंदरी उर्वरक संयंत्र, दामोदर घाटी निगम और आईएफसीआई जैसी संस्थाओं की स्थापना में उनके योगदान को भी रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री ने युवाओं से विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए डॉ. मुखर्जी के विचारों को समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
