लैंड पूलिंग फायदे का सौदा, यूडीए से पहले किसानों ने काट दी कॉलोनी

उज्जैन:लैंड पूलिंग योजना के तहत विकास प्राधिकरण ने किसानों की आधी जमीन ली और 50′ प्लाट विकसित करके अन्नदाताओं को वापस कर दिए,वहां पर दो कॉलोनी निजी तौर पर काट दी गई है, वहीं अब विकास प्राधिकरण टीडीएस 3 से लेकर 7 तक बना रहा है.विकास प्राधिकरण द्वारा नीमनवासा-विक्रम नगर, हक्कानीपुरा, लालपुर क्षेत्र में टीडीएस-3, 4, 5, 6 और 7 आवासीय योजना लांच की गई है जो तेजी से आकार ले रही हैं.

करीब 150 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में विकसित हो रही इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 750 करोड़ रुपये से अधिक है, विक्रम नगर मार्ग से लगाकर उज्जैन गरोठ फोरलेन तक यह कॉलोनी आकर ले रही है. नवभारत से चर्चा में विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी ने बताया कि योजना का ले-आउट स्वीकृत हो चुका है तथा निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया है. क्षेत्र में सड़क निर्माण, फाउंडेशन कार्य, जल प्रदाय व्यवस्था, विद्युत व्यवस्था और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास तेजी से किया जा रहा है. इस कॉलोनी के चारों तरफ से रास्ते रहेंगे उद्योगपुरी, देवास उज्जैन आगर रोड प्रमुख है.

लंबी चौड़ी सडके
यूडीए सीईओ संदीप सोनी ने बताया कि यहां 18, 24 और 30 मीटर चौड़ी सड़कों का निर्माण किया जा रहा है, यहां टू लेन रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी. मौके पर ब्रिज का निर्माण शुरू कर दिया गया है.

लैंड पूलिंग योजना
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि किसानों से पारंपरिक तरीके से भूमि अधिग्रहण कर मुआवजा देने के बजाय लैंड पूलिंग मॉडल अपनाया गया है. इसके तहत किसानों को उनकी जमीन का 50 प्रतिशत हिस्सा विकसित भूखंड के रूप में वापस दिया गया है.

कॉलोनी काट कर बेच दी
इन विकसित भूखंडों का उपयोग किसान स्वयं निर्माण के लिए कर सकते हैं या उन्हें बेचकर आर्थिक लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं. कई किसानों ने अपने भूखंडों का उपयोग कर निजी कॉलोनियां विकसित करना भी प्रारंभ कर दिया है, जिससे वे इस विकास प्रक्रिया के सीधे भागीदार बने हैं.

बड़े-बड़े प्लाट बचेगा यूडीए
उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित की जा रही इस योजना में आवासीय, व्यावसायिक, सामुदायिक और हरित क्षेत्रों का समुचित विकास किया जाएगा. योजना में 5 प्रतिशत क्षेत्र खुला क्षेत्र, 5 प्रतिशत खेल मैदान, लगभग 20 प्रतिशत सड़कें तथा शेष क्षेत्र विभिन्न विकास कार्यों के लिए आरक्षित किया गया है. यहां एक से दो बीघा तक के बड़े भूखंडों सहित विभिन्न आकार के आवासीय और व्यावसायिक प्लॉट विकसित किए जा रहे हैं.

इनका कहना है
महाकाल मंदिर से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस क्षेत्र में प्राधिकरण की योजना पूर्ण रूप से विकसित होने से पहले ही निजी स्तर पर 2 कॉलोनियों का विकास प्रारंभ हो चुका है, जो इस क्षेत्र में विकास की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाता है। विक्रम नगर रेलवे स्टेशन, उज्जैन-गरोठ फोरलेन, लालपुर और नीमनवासा सहित पूरा क्षेत्र इस योजना से लाभान्वित होगा.
– रवि सोलंकी, अध्य्क्ष, यूडीए

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