राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की कार्यशाला में निखर रही बच्चों की अभिनय प्रतिभा

नीमच। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी), नई दिल्ली के मार्गदर्शन में कलाव्योम फाउंडेशन एवं रंगाभास नाट्यशाला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 30 दिवसीय नि:शुल्क बाल रंगमंच एवं अभिनय कार्यशाला बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को नई उड़ान दे रही है। इंदिरा नगर स्थित फ्यूचर प्राइड स्कूल परिसर में 25 जून से संचालित इस कार्यशाला में जिले के विभिन्न विद्यालयों के करीब 40 बाल प्रतिभागी प्रतिदिन शाम 3 से 7 बजे तक रंगमंच की बारीकियों का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों में अभिनय कौशल विकसित करने के साथ-साथ आत्मविश्वास, संवाद क्षमता, रचनात्मक सोच और व्यक्तित्व विकास को प्रोत्साहित करना है। खेल-आधारित गतिविधियों और व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से बच्चों को सीखने का अवसर मिल रहा है, जिससे वे पूरे उत्साह के साथ प्रशिक्षण में भाग ले रहे हैं।

अनुभवी रंगकर्मियों से मिल रहा प्रशिक्षण

कार्यशाला का निर्देशन प्रख्यात अभिनेता एवं रंगकर्मी सुशील कांत मिश्रा कर रहे हैं। वहीं वरिष्ठ रंगकर्मी सावित्री मिश्रा बच्चों को वॉइस एंड स्पीच, स्टोरी टेलिंग, एकाग्रता, अवलोकन क्षमता, रिद्म (लय) तथा मंचीय अभिव्यक्ति का प्रशिक्षण दे रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को अभिनय के साथ-साथ मंच अनुशासन, शरीर की भाषा (बॉडी लैंग्वेज), भाव-भंगिमाओं और मंच संचालन की बारीकियों से भी परिचित कराया जा रहा है।

रंगमंच से विकसित होता है व्यक्तित्व

कार्यशाला समन्वयक अपर्णा भोसले ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि रंगमंच केवल कलाकार तैयार करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाता है। इसके माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन, संवेदनशीलता, नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क और प्रभावी संवाद कौशल का विकास होता है। उन्होंने बच्चों से सीखने की जिज्ञासा बनाए रखने और रंगमंच से निरंतर जुड़े रहने का आह्वान किया।

अपनी अभिनय शैली विकसित करना सीख रहे प्रतिभागी

कार्यशाला में बच्चों को यह भी समझाया जा रहा है कि अभिनय केवल संवाद बोलना या किसी की नकल करना नहीं है, बल्कि किसी पात्र की भावनाओं, परिस्थितियों और मनोभावों को आत्मसात कर उसे जीवंत रूप में प्रस्तुत करने की कला है।

प्रशिक्षकों ने बताया कि प्रत्येक कलाकार की अपनी अलग सोच, अनुभव और कार्यशैली होती है। इसलिए किसी एक तय अभिनय पद्धति का अनुसरण करने के बजाय कलाकार को अपनी संवेदनाओं, कल्पनाशक्ति और निरंतर अभ्यास के आधार पर अपनी विशिष्ट अभिनय शैली विकसित करनी चाहिए। अभिनय की वास्तविक सफलता दर्शकों के दिल तक भावनाओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाने में निहित है।

मंच भय दूर कर बढ़ाया जा रहा आत्मविश्वास

प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को मंच पर बोलने का आत्मविश्वास विकसित करने, घबराहट पर नियंत्रण पाने, समूह में कार्य करने, त्वरित निर्णय लेने और रचनात्मक सोच विकसित करने के लिए विशेष अभ्यास कराए जा रहे हैं। प्रशिक्षकों का मानना है कि ये गुण बच्चों के भविष्य में शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और सामाजिक जीवन में भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।

26 जुलाई को होगा नाट्य मंचन

30 दिवसीय कार्यशाला का समापन 26 जुलाई को होगा। समापन समारोह में प्रतिभागी बच्चों द्वारा कार्यशाला के दौरान तैयार किए गए नाटक का मंचन किया जाएगा। इस प्रस्तुति के माध्यम से बच्चे अभिनय, संवाद अदायगी, मंच संचालन, अभिव्यक्ति और रंगमंचीय कौशल का प्रदर्शन करेंगे। आयोजकों का कहना है कि यह प्रस्तुति न केवल बच्चों की सीख का प्रदर्शन होगी, बल्कि नीमच की उभरती रंगमंचीय प्रतिभाओं का भी परिचय कराएगी।

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