साणंद सीजी सेमी परिसर का मोदी ने किया उद्घाटन, कहा तेज गति पकड़ रहा है देश का सेमीकंडक्टर उद्योग

साणंद (गुजरात), 04 जुलाई (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गुजरात के साणंद में सीजी सेमी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (ओएसएटी) परिसर का उद्घाटन किया और कहा कि देश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण उद्योग तेज गति पकड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि “भारत जो ठान लेता है, उसे करके दिखाता है।”

सीजी सेमी एक संयुक्त उद्यम कंपनी है जिसे सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस, रेनेसास इलेक्ट्रॉनिक्स (जापान) और स्टार्स माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स (थाईलैंड) ने मिलकर स्थापित किया है।

श्री मोदी ने कहा, “देश में सेमीकंडक्टर उद्योग के विकास का कार्यक्रम पग-पग, ईंट-दर-ईंट, चिप-दर-चिप तेज गति पकड़ रहा है।” उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हो रही यह तेज प्रगति कोई संयोग नहीं है, बल्कि पिछले दस वर्षों में बनायी गयी दीर्घकालिक नीतियों का परिणाम है। यह देश में आयी इलेक्ट्रॉनिक्स क्रांति का स्वाभाविक अगला चरण है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल अंतिम उपभोक्ता उत्पादों का निर्माण नहीं, बल्कि उनके प्रमुख घटकों और सेमीकंडक्टर चिप्स का भी देश में निर्माण करना है। उन्होंने कहा, “पहले उत्पाद, फिर उसके घटक और अब सेमीकंडक्टर – यही मेक इन इंडिया का अगला चरण है।”

कंपनी के ओएसएटी परिसर के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि लगभग पांच साल पहले देश को उन्नत प्रौद्योगिकी का वैश्विक केंद्र बनाने का जो संकल्प लिया गया था, वह अब साकार हो रहा है। “डिजाइन इन इंडिया” और “मेक इन इंडिया” के मंत्र के साथ देश आगे बढ़ा है और अब इस तीसरी प्रमुख इकाई में वाणिज्यिक स्तर पर चिप पैकेजिंग का शुभारंभ हो चुका है।

इस परियोजना की आधारशिला वर्ष 2024 में रखे जाने के बाद इसमें अगस्त 2025 तक चिप परीक्षण का कार्य हो जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “इतनी कम अवधि में आधारशिला से लेकर उत्पादन तक की यात्रा परियोजना से जुड़े सभी सहयोगियों की कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम है।” उन्होंने इस संयंत्र में कार्यरत कर्मचारियों और युवा पेशेवरों से बातचीत की। उन्होंने कहा, “आज जिन भी युवा साथियों से मेरी बातचीत हुई, वे आत्मविश्वास से भरपूर थे।”

उन्होंने इस नयी सुविधा को भारत, जापान और थाईलैंड के उद्योगों के बीच मजबूत साझेदारी का प्रतीक बताया। उनके अनुसार यह केवल एक व्यावसायिक परियोजना नहीं, बल्कि तकनीकी सहयोग, विश्वास और वैश्विक भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी देश की सेमीकंडक्टर यात्रा को नयी गति देगी।

यह परिसर प्रतिवर्ष 20 करोड़ चिप यूनिट के वाणिज्यिक उत्पादन में सक्षम है और प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि टीम शीघ्र ही 500 करोड़ यूनिट प्रतिवर्ष उत्पादन के लक्ष्य को भी प्राप्त करेगी। उन्होंने उद्योग विशेषज्ञों और युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि किसी देश की औद्योगिक शक्ति केवल कारखानों से नहीं बनती, बल्कि एक मजबूत औद्योगिक पारितंत्र से बनती है।

उन्होंने सिलिकॉन वैली, ह्सिनचू साइंस पार्क और त्सुकुबा साइंस सिटी जैसे वैश्विक तकनीकी केंद्रों के उदाहरण देते हुए कहा कि साणंद भी अब उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों में माइक्रोन, केन्स और सीजी सेमी जैसी कंपनियों ने उत्पादन शुरू किया है। आने वाले समय में विशेष रसायन निर्माता, परीक्षण प्रयोगशालाएं, डिजाइन केंद्र और अनेक स्टार्टअप भी यहां स्थापित होंगे।

उन्होंने कहा कि एक समय भारत मोबाइल फोन आयात करता था, लेकिन आज देश में मोबाइल फोन उत्पादन में 33 गुना वृद्धि हुई है और भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता एवं निर्यातक बन चुका है। मोबाइल निर्माण से शुरू हुई यात्रा अब सेमीकंडक्टर निर्माण तक पहुंच चुकी है। साल 2014 की तुलना में देश का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन लगभग सात गुना बढ़ा है। सरकार ने पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारितंत्र को मजबूत किया है।

युवाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास गवाह है कि हर औद्योगिक क्रांति ने रोजगार के नये अवसर पैदा किए हैं। जिस प्रकार आईटी और मोबाइल निर्माण क्षेत्र ने लाखों रोजगार दिए, उसी प्रकार सेमीकंडक्टर और एआई क्रांति भी अनुसंधान, डिजाइन, उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला सहित अनेक क्षेत्रों में विशाल अवसर प्रदान करेगी।

उन्होंने युवाओं से नयी तकनीकों को सीखने, नये कौशल विकसित करने और नवाचार को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं को इस ऐतिहासिक अवसर का पूरा लाभ उठाना चाहिये और भविष्य की तकनीकी दुनिया में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिये।

प्रधानमंत्री ने इस परियोजना के सामाजिक प्रभाव का उल्लेख करते हुए बताया कि आदिवासी क्षेत्रों की कई युवा महिलाएं इस संयंत्र में कार्य कर रही हैं। आईटीआई से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद इन युवतियों ने मलेशिया में उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण लिया और आज वे विश्व की सबसे आधुनिक चिप निर्माण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, “असाधारण सपने देखने वाली ये बेटियां आज ‘मेड इन इंडिया’ चिप निर्माण की महत्वपूर्ण भागीदार हैं।”

 

 

Next Post

बेथेल ने भारत को धो डाला, इंग्लैंड को 1-0 की बढ़त

Sat Jul 4 , 2026
मैनचेस्टर, 04 जुलाई (वार्ता) जेकब बेथेल (नाबाद 76) की तूफानी पारी से इंग्लैंड ने भारत को दूसरे टी 20 में शनिवार को एक ओवर शेष रहते चार विकेट से हराकर पांच मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए इशान किशन (49), अभिषेक […]

You May Like