ग्वालियर: ग्वालियर में बिजली व्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं में लगातार असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। शहर के कई इलाकों में अघोषित बिजली कटौती, बिजली बिलों में कथित अनियमितताएं तथा बिजली विभाग के कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर आम नागरिक नाराजगी जता रहे हैं।उपभोक्ताओं का कहना है कि कई मामलों में बिजली मीटर की वास्तविक यूनिट खपत से अधिक बिल आने की शिकायत है। जब उपभोक्ता इसकी जानकारी लेने बिजली विभाग के कार्यालय पहुंचते हैं तो उन्हें स्पष्ट जवाब देने के बजाय यह कहकर टाल दिया जाता है कि “यूनिट कम बन रही है” या अन्य तकनीकी कारण बताए जाते हैं। इससे लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।
शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि विभाग के कर्मचारी घरों में लगे विद्युत उपकरणों के आधार पर लोड का आकलन करते हैं। उपभोक्ताओं का सवाल है कि यदि बिल का आधार उपकरणों की संख्या और लोड ही है, तो फिर बिजली मीटर लगाने का उद्देश्य क्या रह जाता है। उनका कहना है कि बिल निर्धारण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
इसके अलावा उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली बिल में ऊर्जा प्रभार, नियत प्रभार, विद्युत शुल्क तथा अन्य मदों को जोड़ने के बाद बिल की राशि सामान्य खपत की तुलना में काफी अधिक हो जाती है। लोगों का कहना है कि यदि किसी उपभोक्ता ने 100 यूनिट बिजली खर्च की है तो उसे प्रति यूनिट निर्धारित दर के अनुसार बिल समझ में आना चाहिए, लेकिन अतिरिक्त प्रभारों के कारण कुल राशि काफी बढ़ जाती है। इससे आम परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
स्मार्ट मीटर को लेकर भी कई उपभोक्ताओं ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर लागू होने के बाद भी बिल संबंधी शिकायतें कम होने के बजाय बढ़ती नजर आ रही हैं।
बढ़ती महंगाई के बीच आम नागरिकों का कहना है कि वे घरेलू खर्च संभालें या बिजली विभाग की समस्याओं से जूझें। उपभोक्ताओं ने ऊर्जा विभाग से बिजली बिल निर्धारण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने, अघोषित बिजली कटौती पर रोक लगाने तथा शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है।
