बेमेतरा, 02 जुलाई (वार्ता) छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले की ग्राम पंचायत राहुरपुर और उसके आश्रित ग्राम खैरी के ग्रामीण पिछले करीब 20 वर्षों से सड़क, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं लेकिन आज तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार बारिश के मौसम में गांव की हालत और भी बदतर हो जाती है। कीचड़ से भरी गलियों और बदहाल सड़कों के कारण लोगों का घर से निकलना मुहाल हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में यदि कोई व्यक्ति अचानक बीमार पड़ जाए तो सबसे बड़ी समस्या उसे अस्पताल तक पहुंचाने की होती है। गांव के अंदर तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती, क्योंकि सड़कें पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाती हैं। ऐसे में मरीज को चारपाई या कंधे के सहारे उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है, जहां से एंबुलेंस मिल पाती है। इससे कई बार मरीज की जान पर भी बन आती है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव की गलियां पूरी तरह कीचड़ और जलभराव से भरी रहती हैं। जगह-जगह पानी जमा होने से जहरीले सांप, बिच्छू और अन्य विषैले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है। बारिश के दिनों में बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बिजली व्यवस्था भी ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा रही है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार लगातार दो-दो दिनों तक बिजली आपूर्ति बंद रहती है, जिससे लोगों को अंधेरे में रात बितानी पड़ती है। बिजली नहीं रहने से बच्चों की पढ़ाई, घरेलू कामकाज और दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित होता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने पिछले दो दशकों में कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने सड़क, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग रखी है। कई बार आवेदन और शिकायतें भी दी गईं लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। उनका कहना है कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव की समस्याओं को भुला दिया जाता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि गांव में जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, बिजली व्यवस्था में सुधार किया जाए तथा अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि ग्रामीणों को वर्षों से चली आ रही परेशानियों से राहत मिल सके।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर राहुरपुर और खैरी के ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं कब मिलेंगी? क्या 20 वर्षों से चली आ रही उनकी मांग पर प्रशासन और जनप्रतिनिधि अब गंभीरता दिखाएंगे, या फिर ग्रामीणों को इसी तरह बदहाल व्यवस्था के बीच जीवन गुजारना पड़ेगा।
