वाशिंगटन/दोहा, 01 जुलाई (वार्ता) ईरान और अमेरिका के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौते को लागू करने तथा ईरान की जब्त संपत्तियों की स्थिति पर ईरान और कतर के बीच बुधवार को चर्चा करने की उम्मीद है। यह वार्ता कतर की राजधानी दोहा में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और कतरी मध्यस्थों के बीच हुई बैठकों के बाद आयोजित की जा रही है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि दोहा में होने वाली इस वार्ता में कतरी पक्ष के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा। इसमें ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते के कुछ प्रावधानों को लागू करने, विशेषकर प्रतिबंधित ईरानी संपत्तियों की रिहाई से जुड़ी व्यवस्थाओं पर चर्चा होगी।
इससे पहले ईरान ने मंगलवार को दोहा पहुंचे शीर्ष अमेरिकी दूतों से मिलने से इनकार कर दिया था। श्री बघाई ने स्पष्ट किया था कि ईरान के प्रतिनिधियों के अमेरिकी अधिकारियों से मिलने की कोई योजना नहीं है। इस बीच कतर के विदेश मंत्रालय ने बताया था कि श्री विटकॉफ और श्री कुशनर मंगलवार को कतरी मध्यस्थों के साथ बैठक के लिए दोहा पहुंचे थे। इस दौरान मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान वार्ता और व्यापक क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा हुई। हालांकि, कतर ने भी जोर दिया था कि अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच किसी भी सीधी बैठक का कार्यक्रम तय नहीं है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने कहा कि बातचीत में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की गयी। इसके साथ ही, क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए बातचीत के जरिए आगे बढ़ने पर जोर दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल दोनों देशों के अधिकारियों के बीच तकनीकी स्तर पर चर्चा जारी है, लेकिन अभी किसी बड़े या उच्च स्तरीय बैठक की योजना नहीं है।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, कतरी अधिकारियों ने बताया कि बैठक में लेबनान संघर्ष विराम समझौते पर भी चर्चा की गई। इसमें स्थिरता बनाए रखने और लेबनान की संप्रभुता तथा एकता का समर्थन करने पर विशेष बल दिया गया।
इस बातचीत का सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि ईरान के करीब 6 अरब डॉलर, जो पहले जब्त कर लिए गए थे, अभी तक तेहरान को नहीं मिले हैं। कतर ने साफ कहा है कि यह राशि तभी विमुक्त की जाएगी जब अमेरिका-ईरान बातचीत में आगे प्रगति होगी। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का कहना है कि कतर में रखी यह रकम जल्द मुक्त करके ईरान को सौंप दी जाएगी। ईरान और अमेरिका के बीच 18 जून को आभासी रूप से हस्ताक्षरित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को बहाल करने और ईरानी जहाजों पर से प्रतिबंध हटाने की समयसीमा तय की गयी है।ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका और ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम जैसे अधिक जटिल विषयों पर बात करने से पहले उस संघर्ष विराम की शर्तों को सुलझाना होगा, जिसपर 18 जून को हस्ताक्षर किए गए थे।
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, दोहा में हो रही यह राजनयिक हलचल व्यापक क्षेत्रीय चर्चाओं का हिस्सा है। इसमें ओमान द्वारा अमेरिका और उसके सहयोगियों को होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा के संबंध में सौंपे गए प्रस्ताव भी शामिल हैं। ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने सरकारी टीवी पर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान और ओमान की संप्रभुता है, इसलिए इस जलमार्ग में यातायात ईरान द्वारा निर्धारित व्यवस्थाओं के अधीन ही होगा।
दूसरी ओर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ‘द माइकल नोल्स शो’ में एक साक्षात्कार के दौरान इस रुख को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान को इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह मामला ऐसे मोड़ पर खत्म नहीं होगा जहां ईरानी होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूल रहे हों। इस बीच, पिछले हफ्ते अमेरिका की मध्यस्थता में हुए समझौते पर हस्ताक्षर होने के बावजूद लेबनान में तनाव बना हुआ है, क्योंकि इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्ला के एक सदस्य को निशाना बनाकर हवाई हमले किए हैं।

