
रीवा, प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ के आह्वान पर प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन के तहत शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय रीवा में प्राध्यापकों ने अपनी लंबित मांगों के निराकरण की मांग को लेकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन प्रारंभ किया. आंदोलन के प्रथम चरण में प्राध्यापकों ने अपने नियमित शैक्षणिक एवं प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण एवं सांकेतिक रूप से विरोध दर्ज कराया.
प्राध्यापकों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन विद्यार्थियों के हितों को प्रभावित किए बिना संचालित किया जा रहा है. कक्षाएं नियमित रूप से संचालित की जा रही हैं तथा महाविद्यालय की समस्त शैक्षणिक गतिविधियां पूर्ववत जारी हैं. आंदोलन का उद्देश्य उच्च शिक्षा विभाग का ध्यान वर्षों से लंबित मांगों की ओर आकर्षित कर उनका शीघ्र एवं न्यायसंगत निराकरण सुनिश्चित कराना है. प्राध्यापक संघ द्वारा प्रमुख रूप से वर्ष 2004 एवं 2006 में नियुक्त बैकलॉग सहायक प्राध्यापकों की परिवीक्षा अवधि नियुक्ति तिथि से दो वर्ष पश्चात समाप्त मानते हुए उन्हें समयानुसार कैरियर का लाभ प्रदान करने की मांग की गई है. इसके साथ ही ऐसे शिक्षकों, जो निर्धारित समयावधि में आवश्यक शैक्षणिक योग्यता पूर्ण नहीं कर सके हैं, उन्हें वर्ष 2028 तक आवश्यक योग्यता अर्जित करने का अवसर प्रदान किए जाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई. आंदोलन में डॉ. बी.पी. सिंह, डॉ. संजय सिंह, डॉ. अमित तिवारी, डॉ. अखिलेश शुक्ल, डॉ. महानंद द्विवेदी, डॉ. संजय शंकर मिश्र, डॉ. कुमुद श्रीवास्तव, डॉ. कल्पना अग्रवाल, डॉ. एस.पी. सिंह, डॉ. रावेन्द्र सिंह, डॉ. अश्वनी द्विवेदी, डॉ. बी.के. शर्मा, डॉ. सरिता पाठक, डॉ. विनोद कुमार मिश्रा, डॉ. सत्येन्द्र पटेल, डॉ. अतुल शुक्ला, डॉ. ज्योत्सना द्विवेदी, डॉ. उर्मिला वर्मा, डॉ. वंदना त्रिपाठी, डॉ. फरजाना बानों, डॉ. ममता कोरी, डॉ. गुलसेर अहमद, डॉ. प्रशांत चौरसिया, डॉ. रत्नेश्वरी केसरी, डॉ. विनोद विश्वकर्मा, प्रो. शालिनी पाण्डेय, प्रो. हर्षिता द्विवेदी सहित महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक उपस्थित रहे और काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन में सहभागिता की.
