
आष्टा। मानसून की पहली झमाझम बारिश ने नगर पालिका की जल निकासी और सफाई व्यवस्था की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी. मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे से 3 बजे तक हुई लगातार तेज बारिश के बाद शहर के अधिकांश हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई. कई प्रमुख सड़कें तालाब जैसी नजर आने लगीं. दुकानों में बारिश का पानी भरा गया. नतीजतन आक्रोशित लोगों ने धरना देकर गुस्से का इजहार किया.
दोपहर एक बजे आसमान पर घिरे बादलों ने जमकर बरसना शुरू कर दिया था. पानी बरसने की रफ्तार इतनी तेज थी कि कुछ ही देर में सड़कोंं पर पानी भरा गया. बारिश के दौरान कन्नौद मार्ग सहित शहर के कई प्रमुख मार्गों पर पानी भर जाने से यातायात प्रभावित रहा. नालियों और नालों की समुचित सफाई नहीं होने के कारण पानी सड़कों पर बहने लगा. कई स्थानों पर वाहनों में पानी घुस जाने से वे बीच सड़क पर बंद हो गए, जिससे वाहन चालकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. सबसे अधिक परेशानी बुधवारा क्षेत्र में देखने को मिली, जहां जल निकासी नहीं होने के कारण बारिश का पानी दुकानों और मकानों में घुस गया.
नागरिक मनोहर चौरसिया और मुकेश जैन ने बताया कि हर वर्ष बारिश उनके लिए आफत बनकर आती है. चार महीने तक होने वाली हर तेज बारिश में दुकानों और मकानों में पानी भर जाता है. उन्होंने कहा कि पार्षदों, नगर पालिका और प्रशासन को कई बार शिकायत की गई, लेकिन 20 वर्षों में भी समस्या का समाधान नहीं हो सका. प्रदर्शनकारियों ने नपा के खिलाफ नारे लगाए और बुधवारा क्षेत्र की लगातार उपेक्षा का आरोप लगाते हुए जल निकासी की स्थायी व्यवस्था किए जाने की मांग की. नागरिकों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
20 साल में भी समस्या का नहीं किया समाधान
लगातार जलभराव से नाराज स्थानीय नागरिकों ने उग्र विरोध प्रदर्शन करते हुए धरना दिया. धरने में भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष प्रतिनिधि विशाल चौरसिया, पूर्व हिंदू उत्सव समिति अध्यक्ष कालू भट्ट सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी शामिल हुए. लोगों का कहना है कि पिछले करीब 20 वर्षों से इस क्षेत्र में जलभराव की समस्या बनी हुई है, लेकिन आज तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया. उनका आरोप है कि कई पार्षद बदले, नगर पालिका ने भी बार-बार आश्वासन दिए, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है.
टयूब पर बैठकर पार्षद ने किया पानी में विहार
इछावर. मंगलवार को कुछ देर बरसे बादलों ने तहसील मुख्यालय को तरबतर कर दिया. आलम यह रहा कि सड़कों पर घुटनों तक पानी जमा हो गया जिससे राहगीरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. वहीं निचली बस्तियों के घरों में भी बारिश का पानी जा घुसा. नगर के वार्ड क्रमांक 15 स्थित नाले के समीप तो सड़कों पर बारिश का पानी तेज प्रवाह के साथ बह रहा था. नतीजतन वार्ड पार्षद जुनैद खान ने टयूब पर बैठकर सड़क पर बहने वाले बारिश के पानी पर विहार करते हुए अपने आक्रोश का इजहार किया. उनका कहना था कि नगरपरिषद द्वारा नाले की सफाई कराने में बरती गई उदासीनता के चलते वार्ड में बाढ़ जैसे हालात निर्मित हुए हैं. विरोध का यह तरीका नगर में चर्चाओं में बना रहा.
