रसूख नहीं आया काम, आखिर गिरफ्तारी के बाद कोर्ट से मिली राहत

धामनोद (धार). नगर परिषद धामनोद की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली माने जाने वाले अध्यक्ष प्रतिनिधि विष्णु पाटीदार को आखिरकार कानून के सामने हाजिर होना पड़ा। अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज दो अलग – अलग मामलों में गिरफ्तारी के बाद उन्हें धार स्थित विशेष न्यायालय से कुल 60 हजार रुपए के मुचलकों पर जमानत मिली। इस घटनाक्रम ने नगर की राजनीति में हलचल मचा दी है।

सूत्रों के अनुसार, पिछले कई महीनों से इन मामलों को लेकर नगर में चर्चाओं का दौर जारी था। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठता रहा कि क्या प्रभाव और पहुंच के चलते कार्रवाई की रफ्तार प्रभावित हो रही है। हालांकि घटनाक्रम ने नया मोड़ तब लिया जब दोनों मामलों में गिरफ्तारी की कार्रवाई हुई और आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया।

पहला मामला मुख्य नगर पालिका अधिकारी माया मंडलोई द्वारा दर्ज कराया गया था। आरोप है कि उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने के साथ जान से मारने की धमकी दी गई। इस मामले में धामनोद पुलिस ने अपराध क्रमांक 149/2026 के तहत कार्रवाई कर आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से 30 हजार रुपए के मुचलके पर जमानत मिली।

दूसरा मामला नगर परिषद के सफाई संरक्षक मनोज मेवाती द्वारा दर्ज कराया गया था। अपराध क्रमांक 81/2026 में भी एससी-एसटी एक्ट के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस प्रकरण में भी विशेष न्यायालय ने 30 हजार रुपए के मुचलके पर जमानत मंजूर की।

विवादों से पुराना नाता

नगर परिषद की राजनीति में पिछले तीन वर्षों से विष्णु पाटीदार का नाम लगातार विवादों के साथ जुड़ता रहा है। परिषद की कार्यशैली, प्रशासनिक हस्तक्षेप और विभिन्न घटनाओं को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अब दो अलग-अलग एससी-एसटी एक्ट प्रकरणों में गिरफ्तारी ने इन चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

 

*_कानून का संदेश: पद बड़ा या संविधान? -_*

धामनोद में हुई इस कार्रवाई को कई लोग कानून के प्रभावी हस्तक्षेप के रूप में देख रहे हैं। नगर में चर्चा है कि चाहे व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, जब मामला न्यायालय और विधिक प्रक्रिया तक पहुंचता है तो अंतिम कसौटी कानून ही होता है। गिरफ्तारी और फिर न्यायालय से जमानत मिलने की प्रक्रिया ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी व्यक्ति की जवाबदेही कानून से ऊपर नहीं हो सकती।

*_अब अगली सुनवाई पर निगाहें -_*

दोनों मामलों में जमानत मिलने के बाद कानूनी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। आरोपों की सत्यता का परीक्षण न्यायालय में होगा। आने वाले दिनों में जांच, गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर यह मामला और महत्वपूर्ण मोड़ ले सकता है। नगर की जनता, राजनीतिक दल और प्रशासनिक अमला अब इस बहुचर्चित प्रकरण की अगली सुनवाई पर नजरें टिकाए हुए हैं।

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