रायसेन में धान की खेती में तकनीक का सहारा, मशीनों से बना रहे सीड-ट्रे

रायसेन। मूंग की कटाई के साथ ही किसान धान के रौपे लगाने में जुट गए हैं। इस बार जिलेभर में 2 लाख 10 हजार हेक्टेयर में धान लगाने का लक्ष्य लिया गया है। इसमें धान की खेती में तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। कई किसानों ने सीड ट्रे तैयार कर ली हैं। इसकी बोवनी भी मशीन से की जाएगी।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक जिले में गेहूं के बाद धान का सबसे बढ़ा रकबा लगाया जाता है। इस बार कई किसान तकनीक का उपयोग कर धान की बोवनी कर रहे हैं।सांची ब्लॉक के ग्राम आमा के युवा किसान जिया लाल बघेल सुरेश शर्मा, बागोद के कल्लू खान ने मशीनों से धान के सीड ट्रे बनाई हैं। इसमें धान के रौपे एक प्लेट में तैयार हो रहे हैं। 10 से 15 दिन बाद किसान राइस प्लांटर मशीन के जरिए धान के पौधे रौपने का काम शुरू कर देंगे। कृषि विभाग के मुताबिक किसानों को सभी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है।

मजदूरों की समस्या से मिल रही निजात : गेहूं, चना, और धान की बोवनी से लेकर कटाई तक श्रमिक समस्या किसानों के लिए परेशानी बन जाती है। तकनीक और मशीनों का उपयोग से किसानों को इस समस्या से निजात मिल रही है। इसके अलावा समय की बचत भी हो रही है। इससे किसान धान के साथ दूसरी खरीफ की फसलों को लगा लेते हैं। जिससेे अतिरिक्त आय भी होने लगती है।

इनका कहना है

जिले में इस बार 2 लाख 10 हजार हेक्टेयर में धान की बोवनी की जाएगी। कुछ क्षेत्रों में धान के रौपे लगाने का काम शुरू हो गया है। खेती में तकनीकी सहारा किसान के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।

दुष्यंत धाकड़ प्रभारी उप संचालक कृषि अधिकारी

 

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