डॉ. आशुतोष मुखर्जी की विरासत से प्रेरणा लेने की जरूरत : नड्डा

नयी दिल्ली, 30 जून (वार्ता) केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि भारत को वैश्विक ज्ञान-नेता बनाने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए डॉ. आशुतोष मुखर्जी जैसे महान संस्थान-निर्माताओं की दूरदृष्टि से प्रेरणा लेनी होगी।

श्री नड्डा ने दिल्ली विधानसभा परिसर में डॉ. आशुतोष मुखर्जी की 162वीं जयंती पर आयोजित समारोह में दिल्ली विधानसभा द्वारा प्रकाशित पुस्तक “द कलेक्टेड स्पीचेस ऑफ बंगाल टाइगर आशुतोष मुखर्जी” का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, शिक्षा मंत्री आशीष सूद सहित कई जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इस दौरान श्री नड्डा ने कहा कि डॉ. आशुतोष मुखर्जी ने अपने विधायी भाषणों के माध्यम से नागरिक स्वतंत्रता, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, प्रशासनिक जवाबदेही और राष्ट्रीय आत्मविश्वास जैसे विषयों पर तर्कपूर्ण और संवैधानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं, मूल्य आधारित शिक्षा और उपनिवेशवादी सोच से मुक्ति पर जो बल दिया गया है, वह डॉ. मुखर्जी की शैक्षिक सोच से मेल खाता है। उन्होंने युवाओं और जनप्रतिनिधियों से इस पुस्तक का अध्ययन करने का आग्रह करते हुए कहा कि विकसित भारत-2047 का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब नयी पीढ़ी अपने इतिहास, संवैधानिक मूल्यों और बौद्धिक विरासत से जुड़ेगी।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मोबाइल फोन को प्रतिदिन रिचार्ज करने की आवश्यकता होती है, उसी तरह सार्वजनिक जीवन को भी निरंतर बौद्धिक ऊर्जा की जरूरत होती है और डॉ. मुखर्जी के विचार आज भी संवैधानिक मूल्यों, तर्कपूर्ण विमर्श तथा राष्ट्रभावना से समाज को ऊर्जा प्रदान करते हैं।

विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने डॉ. आशुतोष मुखर्जी को भारत के बौद्धिक पुनर्जागरण का शिल्पकार बताते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा, न्याय और राष्ट्र के आत्मसम्मान के लिए जीवन समर्पित किया। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक दौर में भी उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता की रक्षा की तथा सी.वी. रमन, मेघनाद साहा और सुभाष चंद्र बोस जैसी प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा का यह प्रकाशन शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री साबित होगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि महान विभूतियों का जीवन केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नयी पीढ़ी को निरंतर प्रेरित करता रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण एक सतत प्रक्रिया है और डॉ. आशुतोष मुखर्जी की शिक्षा संबंधी सोच आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पुस्तक युवाओं को उनके जीवन और आदर्शों से प्रेरणा लेने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि शिक्षा ही राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत आधारशिला है और यह प्रकाशन भारत की बौद्धिक विरासत को नयी पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

उल्लेखनीय है कि डॉ. आशुतोष मुखर्जी प्रख्यात शिक्षाविद्, विधिवेत्ता, वर्ष 1904 में इंपीरियललेजिस्लेटिव काउंसिल के सदस्य, कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं मुख्य न्यायाधीश तथा कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति थे।

 

 

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