ननि में राजनैतिक रार मेयर VS एक्स मेयर : ​4 पायदान कूदकर बने थे RO, बड़ी कंपनियों की फाइलें रोकने पर मेघानी की छुट्टी

भोपाल: नगर निगम भोपाल में प्रशासनिक फैसलों के पीछे चल रही राजनीतिक खींचतान अब खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है. इसका ताजा उदाहरण राजस्व अधिकारी अर्जुन मेघानी को पद से हटाए जाने के रूप में सामने आया है. निगमायुक्त ने बीते दिन मेघानी को हटाने के आदेश जारी किए. मेघानी गोविंदपुरा और मध्य विधानसभा क्षेत्रों में राजस्व वसूली व्यवस्था की निगरानी का काम संभाल रहे थे.

अर्जुन मेघानी को पिछले वर्ष सहायक राजस्व निरीक्षक पद से सीधे राजस्व अधिकारी (आरओ) की जिम्मेदारी दी गई थी. उनके जिम्मे संबंधित जोन क्षेत्रों में राजस्व वसूली की निगरानी करना और निगम की आय बढ़ाने के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना था. हालांकि, निगम सूत्रों के अनुसार उनके कामकाज को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं.
सूत्रों का कहना है कि कई बड़ी कंपनियों से जुड़े टैक्स प्रकरणों और भुगतान संबंधी फाइलों के लंबित रहने की शिकायतें निगमायुक्त तक पहुंची थीं. इसके बाद उनके कामकाज की समीक्षा की गई. बताया जा रहा है कि उन्हें पहले भी कार्यप्रणाली में सुधार के लिए समझाइश दी गई थी, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं होने के बाद कार्रवाई की गई.
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मेघानी को गोविंदपुरा क्षेत्र से जुड़े होने के कारण प्रभावशाली माना जाता था और वे वर्तमान महापौर के करीबी अधिकारियों में गिने जाते थे। सूत्रों के अनुसार, मामले में पूर्व महापौर और मंत्री स्तर से हस्तक्षेप के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से भी कार्रवाई के लिए निर्देश दिए गए, जिसके बाद उन्हें पद से हटाया गया. इस घटनाक्रम के बाद नगर निगम की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है और महापौर खेमे में नाराजगी की बात भी सामने आ रही है.
चार पद ऊपर दिए गए पद पर भी उठे सवाल
अर्जुन मेघानी की नियुक्ति को लेकर पहले भी निगम में सवाल उठते रहे हैं. उनका मूल पद सहायक राजस्व निरीक्षक (डीआरओ) बताया जाता है. वर्षों तक जोन प्रभारी की जिम्मेदारी संभालने वाले मेघानी को राजस्व अधिकारी पद की जिम्मेदारी दी गई थी. निगम के कुछ अधिकारियों का कहना है कि सामान्य प्रक्रिया में सहायक राजस्व निरीक्षक से राजस्व निरीक्षक, फिर मुख्य राजस्व निरीक्षक और उसके बाद राजस्व अधिकारी पद तक पहुंचने की प्रक्रिया होती है.

मेघानी को सीधे राजस्व अधिकारी बनाए जाने के बाद निगम के कुछ वरिष्ठ राजस्व निरीक्षकों में भी नाराजगी की चर्चा रही थी. बताया जाता है कि कुछ अधिकारियों ने इसके बाद जोन प्रभारी की जिम्मेदारी लेने से भी इनकार कर दिया था. जिसके बाद पूर्व महापौर के दखल पर शासन स्तर से निर्देश मिलने पर उक्त कार्रवाई निगम आयुक्त को करना पड़ी है. इस बारे में नवभारत संवाददाता के कई प्रयास के बाद भी निगम कमिश्नर से बात नहीं हो पाई

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