
उज्जैन। भरतपुरी में स्थित इस्कॉन मंदिर में सोमवार को पूर्णिमा पर स्नान यात्रा उत्सव मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर में विराजित भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी को पवित्र नदियों के जल से स्नान कराया गया। स्नान कराने के लिए नगर के संत-महंत और जनप्रतिनिधियों के साथ हजारों की संख्या में भक्त उमड़े।
भगवान जगन्नाथ जी की रथ यात्रा से पहले स्नान यात्रा होती है। तीनों भगवान का पहले पंचामृत और गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा सहित विभिन्न तीर्थों के पवित्र जल से अभिषेक-पूजन किया गया। इस्कॉन क मंडली ने परिसर में संगीत के साथ जोरदार कीर्तन किया। इस्कॉन उज्जैन के पीआरओ सुंदर दामोदर दास ने बताया स्नान यात्रा उत्सव के दौरान जल गंगा संवर्धन पखवाड़े का समापन किया गया। अभिषेक में शामिल महिलाओं ने साड़ी और पुरुषों ने धोती-कुर्ता पहने रखा था। सुबह 10 बजे मंदिर परिसर से भगवान की शोभायात्रा निकाली गई, जो विशेष वेदी तक पहुंची। इसके बाद जल से स्नान का सिलसिला शुरू हुआ। इस खास मौके पर उमेश नाथ महाराज, महावीर नाथ महाराज, यूडीए अध्यक्ष रवि सोलंकी उपस्थित हुए। दोपहर 2.30 बजे तक श्रद्धालुओं ने लंबी कतार में लगकर अपने हाथों से भगवान का जलाभिषेक किया। परंपरा अनुसार स्नान यात्रा के बाद भगवान अधिक जल लगने से बीमार हो जाते हैं। इसलिए अब उन्हें 15 दिनों तक विश्राम में रखकर औषधियों से युक्त काड़ा आदि पिलाया जाएगा। जिससे वे स्वस्थ्य हो जाएंगे। फिर भगवान 16 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल की द्वितीया पर विशाल रथों में सवार होकर भाई बलभद्र जी और बहन सुभद्रा जी के साथ यात्रा के रूप में भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकलेंगे।
जगन्नाथ ने भक्तों को दिए गजवेश रूप में दर्शन
स्नान यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा महारानी के गजवेश (हाथी स्वरूप) के दर्शन भक्तों को कराए गए। शाम 6 बजे इस्कॉन उज्जैन में श्रील प्रभुपाद के शिष्य भक्ति चारू स्वामी महाराज की 49 वीं संन्यास वर्षगांठ भी मनाई गई। इस वर्ष मध्यप्रदेश में निकलने वाली 108 रथ यात्राओं में उपयोग होने वाले रथों के साथ विद्यालयों के विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए छोटे रथ भी श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए प्रदर्शित किए जाएंगे।
