शराबी अधिवक्ता का कलेक्ट्रेट में हाईवोल्टेज ड्रामा 

सीधी, जिला कलेक्ट्रेट परिसर में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब कथित रूप से नशे की हालत में एक अधिवक्ता अपनी बुलेट मोटरसाइकिल लेकर सीधे एसडीएम कार्यालय के बरामदे से होते हुए कक्ष तक पहुंच गया। इस अप्रत्याशित घटना से कलेक्ट्रेट भवन में मौजूद अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिक हैरान रह गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अधिवक्ता करीब 15 मिनट तक कलेक्ट्रेट परिसर में हंगामा करता रहा। इस दौरान मौके पर मौजूद प्रशासनिक अमला स्थिति को नियंत्रित करने में सक्रिय नजर नहीं आया और अधिकांश लोग तमाशबीन बने रहे। इसी बीच पटवारी रवि शंकर शुक्ला ने तत्परता दिखाते हुए बुलेट मोटरसाइकिल को एसडीएम कार्यालय के बरामदे से बाहर निकलवाया, जिसके बाद स्थिति सामान्य हो सकी। बताया जा रहा है कि घटना के समय एसडीएम सुश्री प्रिया पाठक अपने कक्ष में मौजूद नहीं थीं। यदि उस समय कार्यालय में अधिकारी अथवा अन्य कर्मचारी मौजूद होते, तो किसी अप्रिय स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता था। घटना ने कलेक्ट्रेट जैसे संवेदनशील सरकारी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खुलेआम एक व्यक्ति का बाइक सहित कार्यालय के भीतर पहुंच जाना सुरक्षा प्रबंधन की बड़ी चूक माना जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होती है या नहीं।

अधिवक्ता का कृत्य अशोभनीय: एसडीएम

इस संबंध में एसडीएम सुश्री प्रिया पाठक ने कहा कि कलेक्ट्रेट भवन के भीतर मेरे कोर्ट तक अधिवक्ता जितेन्द्र मिश्रा द्वारा अपनी बाइक लेकर आना अशोभनीय कृत्य है, उस समय मैं अपने न्यायालय में उपस्थिति नहीं थी लेकिन मुझे जैसे ही जानकारी मिली तत्काल कोतवाली पुलिस को सूचना दी गई, कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच कर अधिवक्ता को अपने साथ ले गई है। उक्त अधिवक्ता के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत कार्यवाही की जा रही है। रही बात लिपिक की तो अभी उनका केश नहीं था, उनकी पेशी अगले माह है।

राजस्व न्यायालय में अंधेरगर्दी: बृजेंद्र सिंह

अधिवक्ता संघ अध्यक्ष बृजेंद्र सिंह ने कहा कि राजस्व न्यायालय में दायर मामलों को लेकर आए दिन अधिवक्ताओं को समस्याओं से जूझना पड़ता है, अब रही बात उक्त अधिवक्ता की तो उन्होंने जो किया वह बिल्कुल सही नहीं है लेकिन उन्होंने ऐसा क्या किया इसकी भी जानकारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्व न्यायालय के विभिन्न स्थानों पर 10 वर्षों से लिपिक जमे हुए हैं, इनके लिए कोई नियम लागू नहीं है। जब तक यह व्यवस्था नहीं बदलेगी तब तक इस तरह की घटनाएं होती रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि कलेक्ट्रेट भवन में आवारा पशुओं और कुत्तों का डेरा हैं, ऐसे में बाइक लेकर जाना बहुत बड़ी बात नहीं है।

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