
जबलपुर। छात्रों को एलजी कंपनी में नौकरी का झांसा देकर फर्जी कैम्पस प्लेसमेंट दिखाकर छात्रों को दिल्ली बुलाया गया, जहाँ एक होटल में बंधक जैसी स्थिति में रखकर उनसे लाखों रुपये ऐंठ लिए गए। पोल खुलने पर आरोपी छात्रों को लावारिस छोड़कर मौके से भाग निकला। आज आईटीआई चौथा पुल, में दोपहर करीब 3 बजे छात्रों ने जमकर हंगामा किया। आक्रोशित छात्रों ने आरोप था कि कॉलेज के करीब 45 छात्रों से करीब 2 लाख 70 हजार रुपए जालसाज द्वारा नौकरी लगाने के नाम पर ठग लिए गए हैं और वह अब फरार हो गया है। छात्रों का सीधा आरोप है कि इस पूरे सुनियोजित स्कैम में ‘न्यू जबलपुर आईटीआई के संचालक पूरी तरह से शामिल हैं। उन्होंने चंद पैसों के लालच में बाहरी जालसाज को कॉलेज में फर्जी कैम्पस करने की अनुमति दी। छात्रों ने मांग की है कि आई.टी.आई. संचालक और फरार आरोपी शुभम समद्दर के खिलाफ तत्काल जालसाजी की एफआईआर एफआईआर दर्ज हो।छात्रों का लूटा गया पैसा और सामान वापस दिलाया जाए। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले इस संस्थान की मान्यता रद्द की जाए। मामले की शिकायत ओमती थाने में की गई है पुलिस छानबीन कर रही है।
मोबाइल पर जाल, झांसे में आए होनहार, तीस हजार सैलरी और फाइव-स्टार सुविधाओं का वादा
पीड़ित छात्र हेमंत कुशवाहा, अनिकेत ठाकुर, शांतनु उपाध्याय, सजीत पटेल, और अभिषेक चौधरी सहित अन्य पीड़ितों ने बताया कि बीते 8 जून को उनके मोबाइल पर संस्थान की ओर से एक टेक्स्ट मैसेज आया। इसमें लिखा था कि 11 जून को कॉलेज में एल.जी. इलेक्ट्रॉनिक्स का कैम्पस आ रहा है, जिसमें 28,000 प्रति माह सैलरी और दिल्ली में पोस्टिंग मिलेगी। रोजगार की तलाश में भटक रहे छात्रों ने इसे सच मान लिया। कैम्पस सिलेक्शन के दौरान मुख्य आरोपी शुभम समद्दर ने छात्रों को बड़े-बड़े सपने दिखाए।
उसने कहा, ग्रेटर नोएडा में 1 महीने की ट्रेनिंग होगी, जहाँ पी.एफ. मिलाकर 30,000 मिलेंगे। केवल 8 घंटे काम करना होगा और ट्रेनिंग के दौरान होटल में वीआईपी रुकने-खाने की व्यवस्था कंपनी करेगी। इस सुनहरे अवसर के चक्कर में कई छात्रों ने अपनी पुरानी चल रही नौकरियां भी छोड़ दीं।
फर्जी ऑफर लेटर थमाया, दिल्ली ले जाकर वसूले पैसे
संस्थान द्वारा छात्रों को बाकायदा ऑफर लेटर बांटे गए। इसके बाद 23 जून को सभी छात्रों को ट्रेन नंबर 12192 से दिल्ली बुलाया गया। हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर उतरते ही शुभम समद्दर उन्हें पास की ही एक होटल ओ. कम्फर्ट इन निजामुद्दीन ले गया। वहाँ चार-चार बच्चों का ग्रुप बनाकर उन्हें कमरों में बंद कर दिया गया। इसके बाद आरोपी ने कहा कि रूम और ड्रेस सिक्योरिटी के नाम पर 6,000 प्रति छात्र जमा करने होंगे, जो 1 हफ्ते में वापस मिल जाएंगे। डरे और सहमे छात्रों ने ऑनलाइन और कैश के माध्यम से पैसे दे दिए, जिसके बदले उन्हें एल.जी. कंपनी की बेहद संदिग्ध और कच्ची रसीदें दी गईं।
प्रिंसिपल के एक फोन से खुला राज, फर्जी निकला आधार कार्ड
इसी बीच जबलपुर से आई.टी.आई. के प्रिंसिपल राजकांत नेमा का छात्रों के पास फोन आया। उन्होंने छात्रों को सचेत करते हुए शुभम समद्दर का पहचान पत्र चेक करने को कहा। जब छात्रों ने कड़ाई से शुभम से उसका आईडी प्रूफ मांगा, तो उसने जो आधार कार्ड व्हाट्सऐप पर भेजा, वह जांच करने पर पूरी तरह फर्जी पाया गया। अपनी पोल खुलती देख आरोपी घबरा गया।
शातिर तरीके से छात्रों को चकमा देकर हुआ फरार
पहचान उजागर होने के बाद आरोपी शुभम समद्दर ने शातिर दिमाग लगाया। उसने छात्रों का शक दूर करने के लिए उन्हें बातों में उलझाया और शाकाहारी-मांसाहारी भोजन का बहाना बनाकर होटल के नीचे रेस्टोरेंट में खाना खाने भेज दिया। जैसे ही छात्र खाना खाने नीचे गए, आरोपी शुभम समद्दर मौका पाकर छात्रों के बैग, कीमती सामान और वसूले गए लाखों रुपये लेकर होटल से रफूचक्कर हो गया।
