नयी दिल्ली, 28 जून (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिन्द महासागर को सेशेल्स और भारत के संंबंधोंं का स्तम्भ बताते हुए कहा है कि भारत ऐसे हिंद महासागर की कल्पना करता है, जहां समुद्री सुरक्षा के साथ आर्थिक समृद्धि भी बढ़े; जहां हमारी साझेदारी आकार नहीं, आपसी सम्मान और विश्वास पर आधारित हो; और जहां हम हर देश के पास-पास नहीं हर देश के साथ-साथ चलें। सेशेल्स यात्रा पर गये श्री मोदी ने रविवार को राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त वक्तव्य में कहा कि हमारी परिकल्पना हिन्द महासागर को अवसरों का महासागर बनाना है। इस दौरान यू पीआई को सेशेल्स में लागू करने तथा जन औषधि जैसे स्वास्थ्य से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग के समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किये गये । प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी यात्रा ऐसे ऐतिहासिक अवसर पर हो रही है, जब सेशेल्स अपनी स्वतंत्रता के पचास वर्ष पूरे कर रहा है, और हम भारत-सेशेल्स राजनयिक संबंधों की भी पचासवीं वर्षगांठ मना रहे हैं। उन्होंने कहा ,” इन पचास वर्षों की यात्रा में हमने मित्रता को विश्वास में, विश्वास को सहयोग में, और सहयोग को जन-कल्याण में बदला है। हिन्द महासागर ने सदियों से भारत और सेशेल्स के संबंधों को सींचा है। इसकी लहरों ने हमारे बीच व्यापार, संस्कृति और मानवीय संबंधों को निरंतर पोषित किया है।”
श्री मोदी ने हिन्द महासागर को साझी विरासत बताते हुए कहा,” हमारा विश्वास है कि हिन्द महासागर हमारा साझा घर है; इसकी सुरक्षा, सततता और समृद्धि हमारी साझा जिम्मेदारी है। यही भावना हमारे महासागर विज़न का आधार है। उन्होंने कहा ,” मेरी सेशेल्स की यात्रा का संदेश स्पष्ट है, भारत ऐसे हिंद महासागर की कल्पना करता है, जहां समुद्री सुरक्षा के साथ आर्थिक समृद्धि भी बढ़े; जहां हमारी साझेदारी आकार नहीं, आपसी सम्मान और विश्वास पर आधारित हो; और जहां हम हर देश के पास-पास नहीं, साथ-साथ चलें। मेरी सेशेल्स की यात्रा का संदेश स्पष्ट है: भारत ऐसे हिंद महासागर की कल्पना करता है, जहाँ समुद्री सुरक्षा के साथ आर्थिक समृद्धि भी बढ़े; जहाँ हमारी साझेदारी आकार नहीं, आपसी सम्मान और विश्वास पर आधारित हो; और जहाँ हम हर देश के पास-पास नहीं, साथ-साथ चलें। हमारी परिकल्पना हिन्द महासागर को अवसरों का महासागर बनाना है। ” प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे संबंधों के पिछले पचास वर्ष गहरे विश्वास और साझा प्रगति के रहे हैं और आने वाले पचास वर्ष नवाचार, सततता और साझा समृद्धि के होंगे।

