इंदौर: जमीन की भूख और पैसों के लालच में रिश्तों के कत्ल का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है. बिजलपुर इलाके में करोड़ों रुपए मूल्य की 5 हेक्टेयर (लगभग 12 एकड़) से अधिक की पुश्तैनी जमीन हड़पने के लिए ससुराल वालों ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं. आरोपियों ने 75 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला को कागजों पर मृत घोषित कर उसका फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया और उसके हिस्से की करोड़ों की जमीन बेच खाई. इतना ही नहीं, विरोध करने पर बुजुर्ग महिला के साथ मारपीट कर उसे घर से भी बेदखल कर दिया.
पुलिस ने इस हाईप्रोफाइल धोखाधड़ी मामले में 13 नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है.पुलिस के अनुसार, 75 वर्षीय पीड़िता द्रौपदीबाई पति रणछोड़ चौधरी निवासी बिजलपुर की शिकायत में बताया कि द्रौपदीबाई के पति रणछोड़ के नाम पर बिजलपुर में 5 हेक्टेयर से अधिक की बेशकीमती जमीन दर्ज थी. पति की मौत के बाद नियमानुसार इस जमीन पर द्रौपदीबाई का नाम चढ़ गया था. जमीन की कीमत करोड़ों में होने के कारण मृत रणछोड़ के भाइयों और परिवार के अन्य सदस्यों की नीयत डोल गई. उन्होंने साजिश रचकर बुजुर्ग महिला से धोखे से कुछ कोरे कागजों पर अंगूठे लगवाए और फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए. आरोपियों ने पहले द्रौपदीबाई के नाम पर दर्ज मकान को औने-पौने दामों में बेच दिया और फिर बुजुर्ग महिला के साथ गाली गलौज व मारपीट कर उसे घर से खदेड़ दिया.
कम पढ़ी-लिखी बेटी बनी मां की ढाल, खुली साजिश की परतें…
घर से निकाले जाने के बाद द्रौपदीबाई अपनी बेटी सुनीता के पास पहुंचीं. सुनीता भले ही कम पढ़ी लिखी है, लेकिन उसने हौसला नहीं हारा. जब सुनीता ने जमीन के रिकॉर्ड की जानकारी जुटाई, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. राजस्व रिकॉर्ड से उसकी मां द्रौपदीबाई का नाम हटाया जा चुका था और जमीन का नामांतरण (म्यूटेशन) कराकर उसे किसी और को बेच दिया गया था. हैरत की बात यह थी कि द्रौपदीबाई को जिंदा रहते हुए भी सरकारी कागजों में मृत घोषित कर दिया और आरोपियों ने सांठगांठ कर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी करवा लिया था. सुनीता ने अपनी बुजुर्ग मां को इंसाफ दिलाने के लिए कड़ा संघर्ष किया और महीनों तक पुलिस अफसरों के दफ्तरों के चक्कर काटे. आखिरकार सीनियर अफसरों के दखल और लंबी जांच के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर लिया.
इन 13 आरोपियों पर दर्ज हुआ मुकदमा...
थाना प्रभारी यशवंत बडोले ने बताया कि पुलिस ने शिकायत और जांच रिपोर्ट के आधार पर 13 लोगों को आरोपी बनाया है. इनमें कैलाश चौधरी, शंकर चौधरी, जगदीश चौधरी, प्रकाश चौधरी, विष्णु चौधरी, शांतिलाल चौधरी, राजन चौधरी, सदन चौधरी, पवित्रा, पार्वती, लखन, मनोज चौधरी (सभी निवासी बिजलपुर) और एक अन्य मददगार रामू नागदावाला (निवासी प्रभुनगर) शामिल हैं. थाना प्रभारी ने बताया कि बुजुर्ग महिला की शिकायत पर उक्त आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने (फोर्जरी) और मारपीट सहित विभिन्न प्रासंगिक धाराओं में केस दर्ज कर लिया. फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र कहां से और कैसे बना, इसकी भी गहन जांच की जा रही है. जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी.
