
जबलपुर। जम्मू एंड कश्मीर आरआरसी के ऑफिसर गेस्ट हाउस में घटित घटना के बाद मिलिट्री अस्पताल में बेटी की हुई मौत के मामले की जांच सीबीआई से कराए जाने की मांग करते हुए पीड़ित पिता की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी है। याचिका में कहा गया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार बेटी के सिर में गंभीर चोट होने का उल्लेख किया है परंतु मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया है।
तमिलनाडु निवासी याचिकाकर्ता पी दक्षिणामूर्ति की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उनकी बेटी अधिवक्ता कविता का विवाह 2 मार्च 2025 को जेएके आरआरसी में डॉक्टर के पद पर पदस्थ मेजर ओम नागार्जुन से हुआ था। विवाह के दौरान उन्होंने 100 तोला सोना, हीरे का हार तथा एसयूपी 700 कार दी थी। इसके बाद घर का सामान खरीदने के लिए 15 लाख रुपये दिये थे। इसके कुछ समय बाद मेजर ओम नागार्जुन को अस्पताल खुलवाने के लिए 2 करोड़ रुपये की मांग करने लगे। बेटी की शादी में हुए खर्च के कारण आर्थिक स्थिति ठीक नही होने के कारण उन्होंने रुपये देने से इंकार कर दिया। बेटी व दामाद ने जबलपुर जाने के लिए वह भी अपने परिवार के साथ मदुरै एयरपोर्ट गये थे। इस दौरान भी दामाद के लिए अस्पताल खुलवाने उसके पिता ने दो करोड़ रुपये मांगे थे। जबलपुर पहुंचने के बाद दामाद के अनुसार 9 जुलाई 2025 को उसकी बेटी बाथरूम में गिर गयी थी,जिसे उपचार के लिए मिलिट्री अस्पताल ले जाया गया। उपचार के दौरान उसकी बेटी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गयी।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मनीष वर्मा ने बताया कि रिकॉर्ड के अनुसार ऑफिसर मेस के बाथरूम कविता उम्र 28 साल 9 जुलाई 2025 की रात को गिरी थी। उसके मिलिट्री अस्पताल में 10 जुलाई को 0.39 बजे एडमिड करवाया गया था। आॅफिसर मेस से अस्पताल के बीच का रास्ता की दूरी महज पांच मिनट की है। कविता को सिर में गंभीर चोट आई थी और उसका पति खुद डॉक्टर है। डॉक्टर होने के कारण उसे पूरी परिस्थितियों का ज्ञान था। ऑफिसर मेस से अस्पताल के बीच लगभग तीन घंटे के दौरान कविता के साथ ऐसा कुछ किया गया था,जिससे उसकी मौत हो जाये। अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार उसे बेहोशी की अवस्था में अस्पताल लाया गया था। उसके पति के बताया था कि कविता के सीने में दर्द हो रहा था।
गोरा बाजार पुलिस ने मर्ग कायम किया परंतु किसी प्रकार की जांच नहीं की। पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर प्रकरण में जांच अधिकारी नियुक्त करने की मांग की गयी। शादी के महज 99 दिन बाद संदिग्ध परिस्थितियों में नवविवाहिता की मौत की जांच नियम अनुसार राजपत्रित अधिकारी से कराई जानी चाहिए थी। पूरे मामले में पुलिस की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। पीड़ित परिवार के द्वारा जब जांच की मांग करते हुए जिला न्यायालय में परिवाद पेश किया गया तो पुलिस के द्वारा दो डॉक्टरों के बयान पेश किया गये। जिसमें कहा गया है कि कविता को दस बजे मिलिट्री अस्पताल में लाया गया है। जबकि मिलिट्री अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार उसे रात 0.39 बजे दाखिल गया था।
स्पष्ट रूप से यह मामला दहेज हत्या का है और ऐसी परिस्थिति निर्मित की गयी गयी कविता की मौत हो जाये। पूरे मामले में पुलिस अधीक्षक तथा गोरा बाजार पुलिस साक्ष्यो को छुपा रहे है। सीबीआई जांच से ही वास्तविकता उजागर होगी। पीड़ित के पिता ने सीबीआई जांच मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
