आस्था और खगोल का संगम: ग्रहण के संयम के बीच कल मनेगी उल्लास की धुलेंडी

ग्वालियर: वर्ष 2026 की होली परंपरा और खगोलीय घटनाक्रम के एक दुर्लभ मोड़ पर खड़ी है। 2 मार्च की रात ‘बुराई पर अच्छाई की जीत’ के प्रतीक होलिका दहन के बाद, आज 3 मार्च को जनमानस ‘आस्था के अनुशासन’ का परिचय दे रहा है। चंद्र ग्रहण के सूतक काल के चलते आज रंगों का उत्सव थमा हुआ है, जो अब कल (4 मार्च) पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा।
संयम का पहरा, साधना का समय
आज सुबह से ही शहर भर के देवालयों के पट सूतक काल के कारण बंद हैं। ग्वालियर के प्रमुख मंदिरों सहित अंचल भर में श्रद्धालु इस समय को उत्सव के बजाय साधना और मंत्र जाप में व्यतीत कर रहे हैं। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्यों का मत है कि ग्रहण की यह स्थिति आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, यही कारण है कि समाज ने आज ‘रंगों के शोर’ के स्थान पर ‘आस्था के मौन’ को प्राथमिकता दी है।
प्रशासनिक सतर्कता और कल की तैयारी
चूँकि आज सार्वजनिक रूप से रंग नहीं खेले जा रहे हैं, इसलिए पुलिस और प्रशासन का पूरा ध्यान कल 4 मार्च को होने वाले मुख्य आयोजन ‘धुलेंडी’ पर केंद्रित है। ग्वालियर नगर निगम और जिला प्रशासन ने आज के संयम की सराहना की है और कल के लिए सुरक्षा व सफाई के विशेष प्रबंध सुनिश्चित किए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की गश्त जारी है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।
व्यापारिक दृष्टि: कल के लिए भारी उत्साह
बाजारों में आज शांति जरूर है, लेकिन यह ‘तूफान से पहले की शांति’ जैसी है। व्यापारियों ने कल के लिए गुलाल, पिचकारी और मिठाइयों का बड़ा स्टॉक तैयार रखा है। ग्रहण की समाप्ति के साथ ही शाम से बाजारों में भारी रौनक लौटने की उम्मीद है, जो कल सुबह एक बड़े उल्लास में तब्दील होगी।

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