वॉशिंगटन | अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर सैन्य संघर्ष में तब्दील हो गया है। हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे सिंगापुर के एक कमर्शियल कार्गो जहाज ‘एम/वी एवर लवली’ पर ईरान द्वारा ड्रोन हमला किए जाने के बाद अमेरिका ने आक्रामक रुख अपनाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान की महत्वपूर्ण मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज साइट्स के साथ-साथ तटीय रडार केंद्रों को निशाना बनाकर भारी बमबारी की है।
सीजफायर का उल्लंघन और अमेरिकी सैन्य जवाब
अमेरिकी अधिकारियों ने इस हमले को ईरान द्वारा किए गए सीजफायर समझौते का सीधा उल्लंघन करार दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना की कड़ी आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि ईरान का यह व्यवहार अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए खतरा है। पेंटागन का कहना है कि यह सैन्य ऑपरेशन ईरान की उकसावे वाली हरकतों को रोकने और नेविगेशन की आजादी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है, ताकि भविष्य में कोई भी देश व्यापारिक जहाजों को निशाना न बना सके।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडराया संकट
इस सैन्य कार्रवाई से क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति और अधिक नाजुक हो गई है। अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि वे जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क हैं और ईरान के साथ हुए समझौतों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटना पर नज़र बनाए हुए है, क्योंकि इस तरह के हमलों से वैश्विक व्यापार आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री सुरक्षा पर दीर्घकालिक असर पड़ने की प्रबल संभावना है।

