इंदौर की तर्ज़ पर मिले रिक्शा चालकों को प्रशिक्षण, सुधर सकती है यातायात की बिगड़ी चाल

जबलपुर: शहर में बढ़ती ई-रिक्शा की संख्या अब यातायात व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ट्रैफिक की अराजकता से हर नागरिक परेशान है, शहर की ऐसी कोई सड़क या रास्ता नहीं जहां दिन में एक बार जाम न लगता हो और इस अव्यवस्था में सबसे बड़ा रोल ई-रिक्शा का हो गया है, क्योंकि इनके लिए कभी कोई नियम नहीं बनाए गए, जिसकी वजह से ई-रिक्शा चालक मनमर्जी पर ऊतारू रहते हैं।
बड़े शहरों की बदली तस्वीर
बिना तय स्टॉपेज के बीच सड़क पर सवारी बैठाने-उतारने, मनमाने ढंग से वाहन खड़े करने और कई जगह यातायात नियमों की अनदेखी से रोज़ाना जाम की स्थिति बन रही है। बात करे अगर प्रदेश में इंदौर- भोपाल के बाद महाराष्ट्र के पुणे की तो यहाँ भी कुछ समय पहले तक ऐसी ही स्थिति थी लेकिन जब से इन शहरों की ट्रैफिक पुलिस, आरटीओ और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर ई-रिक्शा चलाने के लिए ट्रेनिंग और रूट तय करने का निर्णय लिया तब से यहां की व्यवस्था तेजी से सुधरी और आज इन शहरों की ट्रैफिक बेहतर स्थिति में है लेकिन प्रतिशत ई-रिक्शा चालक अप्रशिक्षित हैं।
आवाजाही में होती है परेशानी
व्यस्त बाजारों, चौराहों और प्रमुख मार्गों पर ई-रिक्शा का अव्यवस्थित संचालन न केवल अन्य वाहनों की रफ्तार को प्रभावित कर रहा है, बल्कि पैदल यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। ये अनट्रेंड ई-रिक्शा चालक सवारियों के लिए जब भी सड़क पर रुकते हैं, तो उनकी गाड़ी तिरछी खड़ी होती है, जिसके कारण पीछे से आने वाले वाहनों की आवाजाही में परेशानी होती है। इसके अलावा वन-वे ट्रैफिक और मार्केट के संकरे मार्गों पर इनके लिए कोई नियम नहीं रहता, जिसके चलते ये भीड़भाड़ वाली जगहों में पहुंचकर चाहे जहां पार्किंग करते हैं, जिससे जाम लगता है। नागरिकों का कहना है कि यदि ई-रिक्शा के लिए निर्धारित रूट, स्टैंड और स्टॉपेज तय किए जाएं तथा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, तो शहर की यातायात व्यवस्था में काफी सुधार हो सकता है।
ऐसा है इंदौर का सिस्टम
इंदौर में ई-रिक्शा चालकों को ट्रैफिक पुलिस द्वारा 10 सेक्टर्स में विभाजन, कलर कोडिंग और रूट परमिट की अनिवार्य ट्रेनिंग दी जा रही थी। यहाँ शहर को 32 थानों के तहत 10 सेक्टर में बांटकर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी रूट निर्धारित किए जा रहे थे। वही महिलाओं के लिए भी निःशुल्क ई-रिक्शा ड्राइविंग और बैटरी रखरखाव
का प्रशिक्षण उपलब्ध है। जानकरो का कहना है कि अगर ऐसा सिस्टम जबलपुर शहर में भी अपना लिया जाए तो संस्कारधानी की भी बिगड़ी यातायात की स्थिति सुधारी जा सकती है।

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