जबलपुर: शहर और आसपास के क्षेत्रों से संचालित होने वाली कई यात्री बसों में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह लचर नजर आ रही है। अधिकांश बसों में न तो अग्निशामक यंत्र मौजूद हैं और न ही आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की समुचित व्यवस्था है। नवभारत की टीम ने गत दिवस बसों का जायजा लिया, जो सामने आया वह चौका देने वाला है। सुबह करीब 12 बजे दीनदयाल और छोटी लाइन के पास खड़ी बसों में सवारी को बैठाया जा रहा था। जब बसों को नजदीक से देखा गया तो उनमें ढेरों खामियां दिखीं। आसपास के जिलों की ओर जाने वाली बसों में यात्री सुविधा के नाम पर सिर्फ सीट ही दिखी। गर्मी में बसों में पंखे तक की सुविधा नहीं दिखी। कई बसों के दरवाजे और खिड़कियां भी जर्जर हालत में हैं, जिससे किसी दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा गंभीर खतरे में पड़ सकती है।
रोज़ कर रहे मनमानी
इसके बावजूद संबंधित विभाग द्वारा नियमित जांच और प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से बस संचालक मनमाने ढंग से नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। हर दिन हजारों यात्री इन्हीं बसों में सफर करने को मजबूर हैं और उनकी सुरक्षा भगवान भरोसे है। पड़ताल में यह भी सामने आया कि आइएसबीटी से संचालित कई बसों को नियमों के विपरीत मनमाने तरीके से माडिफाई किया गया है। बसों में चढ़ने और उतरने के लिए महज एक ही द्वार है। बता दें कि सुरक्षित और सुकून के सफर की आस में बसों में यात्रा करने वाले – यात्रियों के लिए सुरक्षा के इंतजाम सिफर हैं। मालूम हो कि सभी बसों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर बसें दौड़ रही हैं। बस संचालन के लिए गाइडलाइन बनी हुई है, लेकिन वह सिर्फ कागजों तक सीमित है।
