आइजोल, 26 जून (वार्ता) मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में मिजोरम पहला ऐसा राज्य बनकर उभरा है, जिसने गणना प्रपत्र का 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण पूरा कर लिया है।
मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने कहा कि डिजिटलीकरण की प्रक्रिया 28 जून की समय-सीमा से तीन दिन पहले ही गुरुवार शाम को पूरी हो गयी। इसके साथ ही मिजोरम देशव्यापी संशोधन कवायद के तीसरे चरण में पूर्ण डिजिटलीकरण हासिल करने वाला पहला राज्य बन गया है।
उन्होंने बताया कि महीने भर चलने वाली यह कवायद 30 मई को राज्यभर में 1,301 बूथ स्तर के अधिकारियों की तैनाती के साथ शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य घर-घर जाकर मतदाताओं की गणना और सत्यापन करना था। चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुरूप पूरी डिजिटलीकरण प्रक्रिया निर्धारित समय से पहले पूरी कर ली गयी।
आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि 2005 में किए गए पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद से मिजोरम के मतदाताओं की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2005 में 5,59,123 से बढ़कर 2025 में 8,75,068 हो गयी है, जिसमें 4,23,397 पुरुष और 4,51,671 महिला मतदाता शामिल हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण के सफलतापूर्वक पूरा होने के बावजूद 46,434 मतदाताओं से गणना प्रपत्र एकत्र नहीं किए जा सके। मतदाताओं की यह संख्या राज्य के कुल मतदाताओं का 5.31 प्रतिशत है।
चुनाव अधिकारियों के विस्तृत विश्लेषण में पाया गया कि उन मतदाताओं में से 21,194 (जो कि 45.64 प्रतिशत हैं) की मृत्यु हो चुकी थी, जबकि 14,179 मतदाता (30.53 प्रतिशत) अपने निवास स्थानों से स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गये थे। अन्य 2,161 मतदाताओं को वर्तमान पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान पहले ही नामांकित किया जा चुका है।
अधिकारियों ने कहा कि शेष 8,571 मतदाता, या जिनके प्रपत्र एकत्र नहीं किये जा सके, उनका 18.45 प्रतिशत हिस्सा, सत्यापन प्रयासों के बावजूद ढूंढा नहीं जा सका।
चुनाव अधिकारियों ने यह भी खुलासा किया कि राज्यभर में 329 लोगों ने धार्मिक आधार पर मतदाता पंजीकरण से बाहर रहने का विकल्प चुना है। अधिकारियों के अनुसार उन लोगों का मानना है कि मतदाता सूची में नाम दर्ज होना बाइबिल के “नंबर ऑफ द बीस्ट” यानी 666 से जुड़ा हो सकता है। इसलिए उन्होंने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है।
