मुरैना। फर्जी किसानों के पंजीयन का सत्यापन करने वाले 15 पटवारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि जौरा और बानमोर के दो तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
जांच में सामने आया है कि मुरैना, भिंड और राजगढ़ में फर्जी किसानों ने बाजार से खरीदा गया गेहूं समर्थन मूल्य पर बेचकर करीब 4.82 करोड़ रुपए का भुगतान लिया। इस पूरे मामले में मुरैना के 10 समिति प्रबंधकों को भी नोटिस जारी किए गए हैं। उनके जवाब के बाद अन्य आरोपियों पर भी एफआईआर दर्ज की जा सकती है।
मामले का खुलासा सामने आने के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने जांच शुरू कर दी है। ग्वालियर की टीम अब सोमवार से संबंधित जिलों में पहुंचकर खरीदी से जुड़े रिकॉर्ड की गहन पड़ताल करेगी।
पंजीयन की अंतिम तारीख 10 मार्च थी। ज्यादातर फर्जी पंजीयन 5 से 10 मार्च के बीच रात 11 बजे से सुबह 7 बजे के बीच किए गए। जालसाजों ने अनुसूचित जाति और अन्य किसानों के खसरा नंबरों पर अपना पंजीयन करा लिया। कई मामलों में बंटाई का कोई अनुबंध नहीं था, फिर भी तहसील स्तर पर सत्यापन कर दिया गया। पकड़े जाने से बचने के लिए फर्जी किसान एक ब्लॉक में पंजीयन कराते थे, लेकिन गेहूं की तुलाई दूसरे दूरस्थ खरीदी केंद्रों पर कराते थे। जांच में पता चला कि दूसरे किसानों की जमीन पर गेहूं बेचने का पंजीयन किया गया, लेकिन समर्थन मूल्य का पैसा जालसाजों के बैंक खातों में पहुंचा।संदिग्ध पंजीयनों की जांच शुरू हो चुकी थी, लेकिन विभागीय समन्वय की कमी के कारण फर्जी किसानों के खातों में करोड़ों रुपए का भुगतान जारी रहा।
प्रशासन का कहना है कि जांच में शामिल अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों और बिचौलियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। आने वाले दिनों में इस घोटाले में और बड़े खुलासे और सख्त कार्रवाई होने की संभावना है।
कलेक्टर ने कहा…
मुरैना कलेक्टर लोकेश जांगिड़ ने बताया कि 15 पटवारियों को सस्पेंड किया गया है। वहीं दो तहसीलदारों को नोटिस दिए हैं। समिति प्रबंधकों का पक्ष जानने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
