
इंदौर । हाईकोर्ट के स्थानों बेंच ने कर्बला मेले की एमआईसी द्वारा अनुमति निरस्त करने के निर्णय केके निरस्त कर दिया है। साथ ही नगर निगम आयुक्त की अनुमति को बरकरार रखा है। इसके साथ ही एक बार फिर महापौर और निगम आयुक्त के बीच संबंधों में दरार पैदा होना तय हो गया है।
मोहर्रम त्यौहार पर हर साल कर्बला मैदान पर मैला लगता है। उक्त मैले को लेकर कर्बला इंतिजा कमेटी ने नगर निगम आयुक्त से तीन दिन मेला लगाने की अनुमति मांगी थी। आयुक्त ने वार्षिक और वर्षो से कर्बला मैदान पर लगाए जा रहे मेले की अनुमति गुरुवार को जारी कर दी थी। उक्त अनुमति की जानकारी महापौर पुष्यमित्र भार्गव को लगी , तो उन्होंने आपत्ति एमआईसी की वर्चुअल बैठक बुलाई । बैठक में निगम आयुक्त और अन्य अधिकारियों से महापौर ने पूछा कि एमआईसी को जानकारी में लाए बिना अनुमति कैसे जारी कर दी ? जबकि पिछले साल ही कर्बला मैदान इंतिजामिया कमेटी ने दुकानों का किराया नहीं दिया था।
महापौर ने आपातकालीन एमआईसी की वर्चुअल बैठक में सर्वसम्मति कर्बला मैदान मेले लगाने की अनुमति निरस्त कर दी और सिर्फ ताजिए ठंडे करने की अनुमति दी।
महापौर और एमआईसी द्वारा अनुमति निरस्त करने वाले फैसले के खिलाफ कर्बला मैदान इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष अब्दुल हमीद नियारगर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की । याचिका में नगर निगम और एमआईसी को पक्षकार बनाया। हाईकोर्ट में बताया गया कि मेले अनुमति एन वक्त पर निरस्त की गई है। आयुक्त की अनुमति के आधार पर सारी तैयारियां हो चुकी है। इस मामले में न नोटिस दिया और ना ही सुनवाई हुई।
हाईकोर्ट ने तर्को से सहमत होकर एमआईसी के निर्णय को एक तरफा मानते हुए निगम आयुक्त द्वारा जारी अनुमति को बरकरार रखा और एमआईसी के आदेश को निरस्त कर दिया। हाईकोर्ट ने आदेश दिए कि आने वाले साल में कर्बला मैदान मेला कमेटी दो माह पहले अनुमति का आवेदन देंगे और नगर निगम 25 दिन पहले निर्णय लेकर सूचित करेगा।
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एक बाद फिर महापौर और निगमायुक्त ठनी
पुष्यमित्र भार्गव जब से महापौर बने है , उस समय एसडी ही उनकी निगम आयुक्त से पटरी नहीं बैठ रही है। निगमायुक्त प्रतिभा पाल, हर्षिकासिंह, दिलीप यादव से महापौर का विभिन्न मामलों को लेकर समन्वय नही बना।अब क्षितिज सिंघल से कर्बला मैदान मेला को लेकर ठन गई। बताया जा रहा है कि महापौर ने वर्चुअल में आयुक्त क्षितिज सिंघल पर जमकर नाराजगी व्यक्त की। इसके बाद हाईकोर्ट द्वारा अनुमित बरकरार रखने के आदेश होने से महापौर को मुंह के खानी पड़ी। अब एक बार फिर आने वाले कुछ दिनों में आयुक्त और महापौर के बीच शीत युद्ध देखने को मिलेगा।
