वाशिंगटन, 26 जून (वार्ता) अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने गुरुवार को यूरोपीय संघ (ईयू) से मीथेन उत्सर्जन से जुड़े अपने नए नियमों को आगे बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि इन कड़े नियमों की वजह से यूरोप को होने वाला अमेरिकी एलएनजी का निर्यात ‘बड़े पैमाने पर’ घट सकता है, जिससे वहां ऊर्जा की कीमतें और बढ़ेंगी तथा पूरे क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा खतरा मंडराने लगेगा। रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए हमले के बाद, अमेरिका ने यूरोपीय देशों के व्यापार और उद्योगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया था, ताकि वहां से रूसी गैस को पूरी तरह हटाया जा सके और इसके लिए अमेरिका ने प्राकृतिक गैस की आपूर्ति काफी ज्यादा बढ़ा दी थी। लेकिन यूरोपीय संघ के हालिया नियम, खास तौर पर मीथेन से जुड़ा नया नियम, अब अमेरिका और यूरोप के बीच होने वाले इस पूरे ऊर्जा व्यापार को बेहद जोखिम भरा बनाने जा रहे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से आयोजित एक ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में श्री राइट ने कहा कि यूरोपीय संघ का यह मीथेन नियम एक जनवरी, 2027 से लागू होने वाला है। यह नियम दोनों देशों के बीच होने वाले ऊर्जा व्यापार को बड़े खतरे में डाल देगा, क्योंकि इसमें शामिल शर्तें इस बात को बिल्कुल ध्यान में नहीं रखतीं कि दुनिया भर में तेल और गैस का उत्पादन और उसका व्यापार असल में किस तरह से होता है।
श्री राइट ने साफ शब्दों में कहा, “अगर स्थितियां आज जैसी ही बनी रहीं, तो यह लगभग तय है कि अमेरिका से यूरोप की तरफ होने वाली ऊर्जा की आपूर्ति काफी कम हो जाएगी।”यही वजह है कि अमेरिकी मंत्री ने इन नियमों को लागू करने की तारीख को आगे बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि तय समय सीमा खत्म होने से पहले तकनीकी और कानूनी उलझनों को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों को थोड़े और वक्त की जरूरत है।उन्होंने कहा, “हमें एक ऐसे बड़े संकट से बचना होगा, जिसे बहुत ही आसानी से टाला जा सकता है।” अमेरिकी ऊर्जा मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और दुनिया के अन्य बड़े ऊर्जा निर्यातक देश मीथेन नियमों को लेकर ईयू पर लगातार दबाव बना रहे हैं। अभी इसी सप्ताह की शुरुआत में अमेरिका, कतर, अल्जीरिया और नाइजीरिया ने एक साथ मिलकर यूरोपीय आयोग से इस नियम को टालने की मांग की थी। इन देशों का तर्क था कि इससे पूरी दुनिया का ऊर्जा बाजार बिगड़ सकता है और खुद यूरोप की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। श्री राइट का मानना है कि इस नियम की शर्तें आयोग के दफ्तरों में बैठकर तय की गई हैं, जो तेल और प्राकृतिक गैस का निर्यात करने वाले देशों की जमीनी हकीकत से ‘पूरी तरह कटी हुई’ हैं। श्री राइट के अनुसार, इन नियमों की वजह से अमेरिका, कतर, अल्जीरिया और नाइजीरिया से यूरोप जाने वाले तेल का ‘एक बहुत बड़ा हिस्सा’ नियमों के मानकों पर खरा नहीं उतरेगा, जिससे वह अवैध हो सकता है। इसके साथ ही, यूरोप जाने वाले एलएनजी जहाजों के आधे हिस्से को भी इसी तरह की भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
अमेरिकी उर्जा मंत्री ने कहा, “यूरोपीय संघ में ऊर्जा की कीमतें पहले से ही दुनिया के औसत से काफी ज्यादा हैं। यह नियम इन कीमतों में और भी आग लगा देगा। अगले साल जब ये नियम पूरी तरह लागू होंगे, तो सबसे ज्यादा मांग वाले मौसम में बिजली गुल होने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा।” श्री राइट ने यह भी बताया कि इस नियम के तहत तय किए गए जुर्माने और सजा इतनी सख्त हैं कि कोई भी आपूर्तिकर्ता यूरोपीय संघ के नियमों को तोड़ने का जोखिम नहीं उठाएगा। कंपनियां अपने माल को यूरोप भेजने के बजाय दूसरे देशों के बाजारों में मोड़ना ज्यादा पसंद करेंगी। मंत्री ने कहा, “इस नियम में शामिल जुर्माने इतने भारी-भरकम हैं कि किसी भी कंपनी के लिए अपना तेल यूरोप भेजना घाटे का सौदा होगा, जो समझदारी बिल्कुल नहीं है।” श्री राइट ने तर्क दिया कि अमेरिका और अन्य निर्यातक देश भी मीथेन उत्सर्जन को कम करने के पक्ष में हैं और उन्होंने नई तकनीकों तथा कामकाज में सुधार के जरिए इस दिशा में काफी बेहतरीन काम भी किया है, लेकिन यूरोपीय संघ का यह नया ढांचा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की असलियत को समझने में पूरी तरह नाकाम रहा है। मंत्री ने फिर चेतावनी दी कि यह नियम यूरोप में पहले से आसमान छू रहे ऊर्जा के दामों को और बदतर बना देगा। इससे आम परिवारों और छोटे-बड़े व्यवसायों के लिए खर्च उठाना बेहद मुश्किल हो जाएगा और सबसे ज्यादा मांग वाले दिनों में बिजली की भारी किल्लत हो सकती है। श्री राइट ने जोर देकर कहा, “यह कोई छोटा-मोटा नहीं बल्कि एक बेहद गंभीर मामला है।” उन्होंने कहा कि यदि नियमों के लागू होने के बाद ऊर्जा का आयात घटता है, तो पूरे यूरोप को महंगी कीमतों और ब्लैकआउट के भयानक दौर से गुजरना पड़ेगा।
जब श्री राइट से यूरोपीय आयोग के साथ चल रही बातचीत के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि अधिकारियों की तरफ से यह आश्वासन मिलना कि नियमों को लागू करते समय जुर्माने में थोड़ी ढील दी जा सकती है, उन कंपनियों के लिए काफी नहीं है जो लंबे समय के लिए आपूर्ति के बड़े सौदे करती हैं। अमेरिकी उर्जा मंत्री ने इस मीथेन नियम को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के रास्ते में एक ‘बड़ा गैर-आयात शुल्क बाधा’ करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि यह हाल ही में हुए अमेरिका-ईयू व्यापार समझौते की नींव को कमजोर कर देगा, क्योंकि इससे दोनों के बीच ऊर्जा का व्यापार घटेगा और समझौते के तहत तय किए गए बड़े लक्ष्यों को पाना ‘लगभग असंभव’ हो जाएगा।दूसरी तरफ, यूरोपीय आयोग ने अपने इस मीथेन नियम का पूरा बचाव किया है। उसने इसे अपने क्षेत्र की जलवायु रणनीति का एक अहम हिस्सा बताया है और संकेत दिया है कि वह इसे लागू करने के तौर-तरीकों पर अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
ईयू के ऊर्जा आयुक्त डैन जोर्गेंसन ने अब तक इस कानून को दोबारा बदलने की मांगों का साफ विरोध किया है और वह केवल इसे लागू करने के नियमों में थोड़ा मार्गदर्शन देने के ही पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। श्री राइट ने कहा कि अमेरिकी अधिकारी अभी भी अपने यूरोपीय सहयोगियों के साथ लगातार बातचीत के जरिए संपर्क में हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि साल 2027 में इन नियमों के पूरी तरह प्रभावी होने से पहले दोनों पक्ष बातचीत कर कोई बीच का रास्ता या समझौता जरूर निकाल लेंगे।

