जांच होने के बाद होंगे बड़े खुलासे
जबलपुर: जिले में चल रही समर्थन मूल्य पर धांधली और गड़बडिय़ां लगातार सामने आ रही है। जिसके चलते कलेक्टर द्वारा पाटन, शहपुरा के लगभग 11 खरीदी केंद्रों पर औसत से ज्यादा खरीदी होना इसके लिए टीम गठित कर जांच के आदेश दिए हैं। जिसमें से सबसे ज्यादा अनियमितताएं बेला समिति के केंद्र पर देखने को मिली जहां पर चार कांटों से लगभग 35000 क्विंटल धान तोल दी गई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बेला समिति के दो उपार्जन केंद्रों पर लगभग 35000 और 27000 क्विंटल धान का उपार्जन दिख रहा है, लेकिन वास्तविकता में यहां 55000 से 60000 क्विंटल धान रखी हुई है जो की बिना स्टॉल ही तोल दी गई हैं।
प्रबंधक छोड़ बाहरी व्यक्ति कर रहा खरीदी
धान खरीदी में बेला समिति द्वारा दो केंद्र संचालित हो रहे हैं, जो मां अन्नपूर्णा वेयरहाउस और शिव कृपा वेयरहाउस में खरीदी कर रहे हैं। जिसका संचालन समिति के कर्मचारियों द्वारा न करते हुए बाहरी व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है। जो कि धान की खरीद फरोख्त का काम करता है और वह उपार्जन के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एक अधिकारी का करीबी भी बताया जा रहा है, जिसके कारण यहां यह पूरा खेल खेला जा रहा है। ऐसे में कलेक्टर द्वारा समिति की जांच का जो आदेश दिया गया है उसमें उक्त अधिकारी को यदि जांच से बाहर रखा जाता है तो कई कारनामे सामने आ सकते हैं।
धान के बोरों में नहीं लगे हैं टैग
वक्त खरीदी केंद्र पर जो धान रखी हुई है और गोदाम के अंदर भी जो धान रखी हुई है उसमें से ज्यादातर धान पर ना तो समिति का टैग लगा हुआ है और ना ही किसान कोड लिखा हुआ है। ऐसे में किस किसान की कितनी धान है इसका भी पता नहीं है। यह गोरखधंधा इसलिए हुआ ताकि किसी को यह समझ में ना आ सके की उक्त धान किस किसान के द्वारा लाई गई है। क्योंकि बिना स्लॉट के यहां धान की तोल कर दी गई थी और जिन किसानों के स्लॉट थे उनकी धान बाहर पड़ी हुई है और व्यापारियों की धान गोदाम के अंदर सुरक्षित रखी गई है। जिसमें गिनती तो पूरी है लेकिन यह धान किसकी है, इसकी जांच होनी चाहिए।
