खाड़ी क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को खत्म किये जाने से ही हासिल हो सकती है वैश्विक उर्जा आपूर्ति की सुरक्षा : ईरान

नयी दिल्ली, 25 जून (वार्ता) ईरान के तेल मंत्री मोहसिन पाकनेजाद ने कहा है कि पश्चिम एशिया में स्थायी स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा तभी हासिल की जा सकती है, जब क्षेत्र से विदेशी बलों की वापसी हो और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को खत्म किया जाए। श्री पाकनेजाद ने गुरुग्राम में आयोजित 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में कहा कि ईरान सुरक्षित और किफायती ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ब्रिक्स सदस्यों के बीच ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने में सक्रिय और रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

उन्होंने ईरान के खिलाफ हाल ही में अमेरिका-इजरायल के युद्ध के दौरान देश के तेल, गैस, रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए इसे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के खिलाफ एक ‘अंधा युद्ध’ बताया। उन्होंने कहा कि इन हमलों के कारण बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचा, तेल उद्योग के कर्मचारियों की जान गयी, पर्यावरणीय क्षति हुई, आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई और फारस की खाड़ी क्षेत्र में हजारों परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

श्री पाकनेजाद ने चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाइयों के नतीजों ने ऊर्जा बाजार में अस्थिरता, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और दुनिया भर में जीवन यापन की लागत बढ़ाने में योगदान दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का स्पष्ट उल्लंघन हैं। उन्होंने जोर दिया कि बढ़ती ऊर्जा मांग, भू-राजनीतिक जोखिम, बाजार की अस्थिरता, जलवायु चुनौतियों और निवेश की बाधाओं के लिए अधिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग और व्यावहारिक नीति निर्माण की आवश्यकता है। उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2050 तक वैश्विक ऊर्जा जरूरतों में तेल और प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी आधे से अधिक रहने की उम्मीद है।

ईरानी मंत्री ने सदस्य देशों के बीच ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में लचीलापन, स्थिरता और सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से एक ‘ब्रिक्स ऊर्जा सुरक्षा साझेदारी’ बनाने का भी प्रस्ताव रखा। उल्लेखनीय है कि 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक 25-26 जून को आयोजित की जा रही है। ब्रिक्स 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों को एक साथ लाता है, जिनमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।

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