वाहनों की गति मापने वाले राडार उपकरण की गुणवत्ता के नियम 01 जुलाई से होंगे लागू

नयी दिल्ली, 23 जनवरी (वार्ता) केंद्र सरकार ने वाहनों की गति मापने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले राडार उपकरण की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए नियम अधिसूचित किए हैं जिससे सड़कों पर लगने वाले स्पीडगन पर भरोसा बढ़ेगा।

उपभोक्‍ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की गुरुवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार ऐसे गति मापक-राडार बनाने वाली कंपनियों को नियमों के प्रावधानों का अनुपालन करने के लिए जून तक का समय दिया है। नए नियम पहली जुलाई से लागू होंगे।

मंत्रालय के उपभोक्ता कार्य विभाग के विधिक माप विज्ञान प्रभाग ने विधिक माप विज्ञान (सामान्य) नियम, 2011 के अंतर्गत जारी इन नियमों में प्रावधान है कि ऐसे सभी उपकरणों का सत्यापन किया जाएगा और उन पर मुहर लगाई जाएगी ताकि मानव सुरक्षा के लिए उनकी शुद्धता सुनिश्चित की जा सके।

मंत्रालय का कहना है कि ये नियम वाहनों की गति, दूरी और अन्य प्रासंगिक मापदंडों का सटीक माप भी सुनिश्चित करेंगे। इन नियमों के सही कार्यान्वयन से आम लोगों को लाभ होगा तथा यातायात नियमों का अच्छी ढंग से प्रवर्तन करने में सहायता मिलेगी।

इन नियमों का मासौदा तैयार करने के लिए, भारतीय विधिक माप विज्ञान संस्थान (आईआईएलएम), रांची के निदेशक की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी, जिसने ओआईएमएल आर 91 के आधार पर प्रारंभिक मसौदा पेश किया था। नियमों की जरूरतों को समझाने के लिए राज्य विधिक माप विज्ञान विभागों, आरआरएसएल अधिकारियों, निर्माताओं और वीसीओ के लिए मसौदा नियमों पर प्रस्तुति दी गई।

विधिक माप विज्ञान (सामान्य) नियम, 2011 के अंतर्गत इन नियमों को अंतिम रूप देने से पहले सार्वजनिक परामर्श के लिए विभाग की वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया था और हितधारकों के दिए गए सुझावों पर विचार करने के बाद इन्हें अंतिम रूप दिया गया।

बयान में कहा गया है कि सत्यापित रडार स्पीडगन वाहनों की गति को सटीक रूप से मापेंगे, उल्लंघनों की पहचान करेंगे और यातायात कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने में सहायक होंगे। वाहनों की गति मापने के लिए सत्यापित और मुहर लगे रडार उपकरण दुर्घटनाओं, सड़कों की टूट-फूट आदि को रोकने के लिए आवश्यक हैं।

गति मापक उपकरण किसी वाहन की दो जगहों के बीच यात्रा करने में लगने वाले समय का पता लगाकर या रडार, लेजर या अन्य तकनीकों का उपयोग करके समय के साथ स्थिति में परिवर्तन को मापकर काम करते हैं। रडार उपकरण रेडियो तरंगें उत्सर्जित करते हैं जो चलती वाहनों से टकराती हैं, डॉपलर प्रभाव के आधार पर गति की गणना करती हैं।

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