
छतरपुर। महाराजपुर तहसील के ग्राम मऊपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के सर्वे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। गांव के किसानों ने आरोप लगाया है कि उनकी पैतृक भूमि पर स्थित वर्षों पुराने कुएं को सर्वे सूची में गलत तरीके से दूसरे हितग्राही के नाम दर्ज कर दिया गया है। किसानों का कहना है कि इस त्रुटि के कारण उन्हें स्वामित्व और मुआवजे से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
ग्राम मऊपुर निवासी मगना, चत्तु, पंचा और बिहारी अनुरागी सगे भाई हैं। परिवार के अनुसार उनकी पैतृक भूमि पर स्थित कुआं वर्षों से उनके स्वामित्व में है तथा इसका उल्लेख राजस्व अभिलेखों में भी दर्ज है। चत्तु अनुरागी के निधन के बाद उनकी भूमि का नामांतरण उनके वारिसों के नाम पर किया गया था।
किसानों का आरोप है कि 25 जनवरी 2024 को मगना अनुरागी द्वारा कुछ कृषि भूमि का विक्रय श्रीमती केसर पति मुन्ना पटैल को किया गया था, लेकिन उस विक्रय में कुएं वाली भूमि को शामिल नहीं किया गया था। इसके बावजूद केन-बेतवा लिंक परियोजना के सर्वे में कुएं को दूसरे खसरे में दर्शाते हुए केसर पटैल के नाम से जोड़ दिया गया।
पंचा और बिहारी अनुरागी का कहना है कि खसरा नंबर 436 में स्थित पैतृक कुएं को सर्वे में खसरा नंबर 437/2 में दर्ज कर दिया गया है, जिससे भविष्य में मिलने वाले मुआवजे और स्वामित्व अधिकारों पर असर पड़ सकता है। किसानों ने तहसीलदार, एसडीएम और कलेक्टर को आवेदन देकर सर्वे रिकॉर्ड में सुधार और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि समस्या का समाधान नहीं होने पर ग्रामीणों के साथ आंदोलन किया जाएगा।
वहीं, मऊपुर हल्का की पटवारी कल्पना अहिरवार ने बताया कि मामले की जांच कर रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी गई है। उनके अनुसार राजस्व अभिलेखों में खसरा नंबर 437/2 में कुआं दर्ज है तथा खसरा नंबर 436 उससे लगा हुआ है। अब अंतिम निर्णय वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जांच के बाद लिया जाएगा।
