
ग्वालियर चंबल डायरी हरीश दुबे।
ग्वालियर कांग्रेस में गुटबाजी और कार्यकर्ताओं की अपने ही हठी नेताओं के खिलाफ नाराजगी वैसे तो कोई अनूठी बात नहीं है लेकिन बीते रोज हुई मंडलम अध्यक्ष नियुक्तियों ने फिर एक बार कांग्रेस की कलह को उजागर कर दिया है। राजनीतिक अंत:वीथिकाओं से बाहर निकल कर असंतोष अब सोशल मीडिया पर छितरा रहा है। कांग्रेस आईटी सेल के जिलाध्यक्ष रह चुके तरुण यादव ने तो अपनी पोस्ट में तंज कसते हुए कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ने वालों को मंडलम अध्यक्ष बनाए जाने पर डबल बधाई दे दी है। ऐसे वक्त जब साल भर के भीतर निकाय चुनाव होने हैं और पार्टी में बूथ मजबूत करने के लिए गाल बजाए जा रहे हैं, तमाम मंडलम में जनाधारविहीन और स्थानीय छत्रपों की चाकरी करने वालों को थोपे जाने से कांग्रेस के वह जमीनी कैडर हताश है जो पार्टी के आंदोलनों में झंडा डंडा लेकर आगे चलता रहा है और पुलिस की लाठियां भी खाता है।
जिलाध्यक्ष भले ही सुरेन्द्र यादव हैं लेकिन मंडलम अध्यक्षों की नियुक्तियों में ग्वालियर शहर की तीनों विधानसभा सीटों के एकछत्र राजा बने नेताओं की ही चली है। छत्रपों की दलील है कि उन्हें ढाई साल बाद विधानसभा चुनाव लड़ना है, लिहाजा उन्हें चुनावी हित अहित का भी ध्यान रखना है। इसके उलट पार्टी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि संगठन ने जमीनी कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर ऐसे लोगों को मंडलम अध्यक्ष का प्रभार सौंप दिया है जो निष्क्रिय हैं और वरिष्ठ नेताओं ने अपनी पसंद के लोगों को पद बांट दिए हैं, जिससे निष्ठावान और पुराने कार्यकर्ता अब भाजपा से लड़ने में वक्त जाया करने के बजाए अब घर बैठने के बारे में सोचने लगे हैं। कई क्षेत्रों में यह शिकायतें भी सामने आई हैं कि पार्टी से बाहर के नेताओं के इशारे पर नियुक्तियां की गईं। सच्चाई यह भी है कि ग्वालियर-चंबल संभाग में कांग्रेस अलग-अलग गुटों में बंटी हुई है। हर गुट अपने समर्थकों को मंडलम अध्यक्ष बनवाना चाहता था, यही वजह है कि नियुक्तियों के बाद विरोध प्रदर्शन और विवाद की स्थिति बनी है। बहरहाल, संगठन के इस तरह के फैसलों को लेकर कार्यकर्ताओं की नाराजगी भोपाल और दिल्ली तक पहुंच गई है। क्या चुनावी तैयारियों से पहले कांग्रेस इस असंतोष को संभाल पाएगी?
पप्पू यादव आज ग्वालियर आ रहे हैं, लिहाजा कांग्रेस में हलचल है। उन्होंने पिछला चुनाव कांग्रेस से टिकट न मिलने पर बगावत कर निर्दलीय लड़ा था और छठवीं बार सांसद निर्वाचित हुए थे। बाद में उन्होंने अपनी जन अधिकार पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया था। हालांकि पप्पू का मप्र या चंबल की सियासत से कोई सीधा सरोकार नहीं है लेकिन उन्हें युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव मितेंद्र दर्शन सिंह ग्वालियर लेकर आ रहे हैं। युवक कांग्रेस इन दिनों छात्रों की गूँज अभियान चलाकर नीट, सीबीएसई और पेपर लीक जैसे मुद्दे, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता आदि विषयों पर चर्चा के लिए युवा संवाद कार्यक्रम चला रही है। पप्पू यादव का दौरा इसी सिलसिले में है।
*कांग्रेसी विष्णुकांत अब कॉकरोच के भेष में*
विष्णुकांत शर्मा कांग्रेस में हैं और आज भी अपनी कांग्रेसियत से इंकार नहीं करते लेकिन उन्होंने अब कॉकरोच जनता पार्टी का परचम थाम लिया है। आज उन्होंने इसी नए राजनीतिक मंच के बैनर तले नीट परीक्षा के पेपर लीक और धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। कांग्रेस में रहते हुए कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ने के सवाल पर विष्णुकांत का जवाब है कि वे सबसे पहले भारतीय हैं, फिर अंबेडकरवादी हैं और बच्चा बचाओ आंदोलन पहले से ही चला रहे हैं, चूंकि कॉकरोच पार्टी ने देश के बच्चों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा उठाया है, इसलिए उन्होंने इससे जुड़ना उचित समझा। विष्णुकांत दलील देते हैं कि केजीपी कोई रजिस्टर्ड राजनीतिक दल नहीं है बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, लिहाजा दलीय निष्ठाओं पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है। कांग्रेस की सदभावना एवं कौमी एकता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रह चुके विष्णुकांत एक बार पार्टी से बाहर और 2018 में विधानसभा का चुनाव निर्दलीय भी लड़ चुके हैं, बाद में कांग्रेस में वापसी हो गई थी। अन्ना से जुड़े रहे और अब गांधीवादी संगम चलाते हैं।
*सीएम के सामने उठेगी पिछोर को जिला बनाने की मांग*
छह जुलाई को सीएम मोहन यादव का पिछोर दौरा फाइनल होने के साथ ही पिछोर को शिवपुरी से अलग कर नया जिला बनाने की मांग तेज हो गई है। गौरतलब है कि भाजपा ने 23 के विधानसभा चुनाव में पिछोर को जिला बनाने का वादा किया था, तभी तीस साल बाद यहां भाजपा जीत सकी थी।
