तेज रफ्तार कार ने स्कूटी को कुचला, दो युवकों की मौत

जबलपुर:भेड़ाघाट थाना अंतर्गत नेशनल हाईवे कूड़न पेट्रोल पंप के सामने एक तेज रफ्तार कार ने स्कूटी सवार दो युवकों को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण दुर्घटना में दोनों युवकों की मौत हो गई।पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम खैरी निवासी बीरू उर्फ वीरेन्द्र भूमिया और नरेश भूमिया अपनी स्कूटी क्रमांक एमपी 20 जेड जी 3059 पर सवार होकर तेवर स्थित त्रिपुर सुन्दरी मंदिर गए थे। वे वहां टेंट का सामान छोड़ने गए थे। रात करीब 10 बजे जब वे काम निपटाकर वापस घर लौट रहे थे, तभी हाईवे पर कूड़न पेट्रोल पंप के सामने मौत बनकर आ रही कार ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कार क्रमांक एमपी 13 एके 8883 का चालक बेहद तेज गति और खतरनाक तरीके से वाहन चला रहा था। पेट्रोल पंप के सामने कार चालक ने नियंत्रण खो दिया और स्कूटी को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि स्कूटी के परखच्चे उड़ गए और दोनों युवक सड़क पर दूर जा गिरे। हादसे की खबर मिलते ही रोते-बिलखते परिजन और भेड़ाघाट पुलिस मौके पर पहुंची।

दुर्घटना स्थल पर वीरेन्द्र भूमिया के सिर से अत्यधिक खून बह जाने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी। वहीं, नरेश भूमिया सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण लहूलुहान हालत में बेहोश पड़ा था। पुलिस और परिजनों ने आनन-फानन में नरेश को इलाज के लिए मेडिकल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे भी मृत घोषित कर दिया।
हादसे के बाद आरोपी कार चालक अपनी गाड़ी मौके पर ही छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने दोनों वाहनों को जब्त कर लिया है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर फरार कार चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।
बस 10 मिनट में सीधे घर पहुँच रहा हूँ…
वीरेंद्र और नरेश दोनों थे। देर रात जब वे वापस लौट रहे थे, तब वीरेंद्र ने पिता से फोन पर बात की आश्वस्त किया था कि वह कहीं और नहीं रुकेंगे, कहां था कि बस 10 मिनट में सीधे घर पहुँच रहा हूँ…। किसे पता था कि जो बेटा सीधे घर आने का वादा कर रहा था, उसकी साँसें रास्ते में ही थम जाएँगी। फोन कटने के कुछ ही पलों बाद एक तेज रफ्तार ने दो जिंदगियां छीन ली। पिता की आँखों के आँसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। वह बार-बार अपने फोन की स्क्रीन देख रहे हैं, जहाँ ठीक हादसे से 10 मिनट पहले उनके बेटे वीरेंद्र का नाम चमका था। वह आवाज अब हमेशा के लिए खामोश हो गई है, लेकिन पिता के कानों में आज भी वही आखिरी शब्द गूँज रहे हैं बस 10 मिनट में घर आ रहा हूँ।
मासूमों के सिर से उठा साया
मृतक वीरेंद्र और नरेश दोनों शादीशुदा थे और दोनों के दो-दो बच्चे हैं। इस हादसे ने एक झटके में दो पत्नियों का सुहाग छीन लिया और चार मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए हटा दिया है।

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