
मंडला। शासन की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत निरामयम योजना मंडला जिले में प्रशासनिक खींचतान के चलते प्रभावित होती दिखाई दे रही है। प्रदेश स्तर पर निजी एजेंसी का अनुबंध समाप्त होने के बाद राज्य स्वास्थ्य एजेंसी और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा योजना को निर्बाध रूप से संचालित रखने के निर्देश जारी किए गए थे, जिनमें रोगी कल्याण समिति के माध्यम से वैकल्पिक मानव संसाधन नियुक्त करने की बात कही गई थी। इसके बावजूद जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नियुक्तियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
जानकारी के अनुसार, पूर्व में कार्यरत एजेंसी का अनुबंध 22 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुका है। संशोधित आदेश में आयुष्मान कार्ड निर्माण और क्लेम रजिस्ट्रेशन के लिए उपलब्ध संसाधनों के उपयोग तथा आवश्यकता पड़ने पर रोगी कल्याण समिति निधि से नियमानुसार मानव संसाधन नियुक्त करने का उल्लेख है। नई एजेंसी के चयन तक यह अंतरिम व्यवस्था लागू रखने के निर्देश दिए गए हैं।
कमीशन के आरोपों के बीच विवाद
जिला अस्पताल के कुछ आयुष्मान मित्रों ने आरोप लगाया है कि उन्हें आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से कार्य करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि रोगी कल्याण समिति के माध्यम से सीधे नियुक्त होने पर उन्हें अधिक वेतन मिल सकता है, जबकि निजी आउटसोर्स व्यवस्था में पारिश्रमिक काफी कम बताया जा रहा है। इसी विवाद के चलते पिछले डेढ़ माह से उनका कार्य प्रभावित होने की बात सामने आई है।
कार्ड निर्माण और क्लेम प्रक्रिया प्रभावित
नियुक्ति न होने से अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड निर्माण और क्लेम रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया धीमी पड़ने की शिकायतें मिल रही हैं। इससे पात्र मरीजों को मुफ्त उपचार का लाभ लेने में कठिनाई हो रही है, वहीं स्टाफ को मिलने वाला इंसेंटिव भी लंबित बताया जा रहा है। कुछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों ने रोगी कल्याण समिति के पास फंड की कमी की बात भी कही है।
प्रशासनिक दखल के बावजूद स्थिति स्पष्ट नहीं
मामले को लेकर आयुष्मान मित्रों ने सिविल सर्जन से भी गुहार लगाई है। हालांकि स्थानीय स्तर पर नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अभी तक अंतिम समाधान सामने नहीं आया है और नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया जारी बताई जा रही है।
