तत्कालीन सिविल सर्जन के विरुद्ध आरोप पत्र जारी   

सतना : थैलेसीमिया से पीडि़त बच्चों को संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के मामले में जिला चिकित्सालय में संचालित में रक्त कोष की कार्यप्रणाली में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं. जिसकी जिम्मेदारी तय करते हुए तत्कालीन सिविल सर्जन के विरुद्ध 4 बिंदुओं को आरोप पत्र जारी किया गया है. पखवाड़े भर के भीतर संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं होने पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चत की जाएगी.वरिष्ठ संयुक्त संचालक शिकायत मप्र भोपाल द्वारा जिला चिकित्सालय सतना के तत्कालीन सिविल सर्जन और वर्तमान में मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी सतना डॉ. मनोज शुक्ला के विरुद्ध आरोप पत्र जारी किया गया है.

जारी आरोप पत्र में उल्लेखित 4 बिंदओं पर विस्तृत जवाब मांगा गया है. जिसके प्रथम बिंदु में यह उल्लेख किया गया है कि रक्त कोष में ब्लड डोनरों का उचित रिकार्ड संधारण नहीं किया गया. रक्त की जांच के लिए उपयोग में लाई गई किट का कंपनी विवरण, बैच नंबर आदि संधारित नहीं किया गया. बच्चों को रक्त चढ़ाने से पहले एचआईवी सहित अन्य परीक्षण नहीं किया गया. जिसकी वजह से यह कृत्य कदाचरण की श्रेणी में आता है. वहीं दूसरे आरोप में यह उल्लेख किया गया है कि रक्त कोष में डोनरों की जांच निर्धारित मानकों के हिसाब से नहीं की गई.

चूंकि रक्त कोष का निर्धारित मानकों के हिसाब से संचालन कराना तत्कालीन सिविल सर्जन की जिम्मेदारी थी. लेकिन उनके द्वारा अपने कत्र्तव्यों का निवर्हन नहीं करना, गंभीर अनुशासनहीनता माना गया. इसी कड़ी में तीसरे बिंदु में यह उल्लेख किया गया है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा तत्कालीन सिविल सर्जन के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है. इसके अलावा चौथे बिंदु में स्टैंडर्ड क्लीनिकल केयर गाइडलाइन और सेफ्टी प्रोटोकॉल जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में लापरवाही और उदासीनता बरतने जैसे आरोप तत्कालीन सिविल सर्जन के विरुद्ध लगे हैें. आरोप पत्र में यह उल्लेख भी स्पष्ट है कि पखवाड़े भर के भीतर जवाब प्रस्तुत न होने की दिशा में एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी.

क्या है मामला
लगभग 6 महीने पहले जब इस बात की जानकारी सामने आई कि थैलेसीमिया से पीडि़त बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाया दिया गया तो जिला ही नहीं बल्कि राज्य से लेकर दिल्ली तक खलबली मच गई थी. हलांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य और केंद्र स्तर की टीम भी सतना पहुंची और जांच की. लेकिन अपेक्षित जानकारी सामने नहीं आने पर इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित कर दिया गया. वैसे तो इस तरह की गंभीर लापरवाही सामने आने पर रक्त कोष प्रभारी सहित वहां पदस्थ 2 टेक्रीशियन को निलंबित कर दिया गया था. लेकिन विशेष जांच दल के द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर अब उक्त मामले में तत्कालीन सिविल सर्जन की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है.

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