नई दिल्ली। 26 दिसंबर, 2025। क्रिसमस 2025 के अवसर पर देश के कुछ हिस्सों, विशेषकर केरल के पलक्कड़ और राजस्थान के नागौर से ईसाई समुदाय के खिलाफ उत्पीड़न और हिंसा की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसे भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत और संवैधानिक स्वतंत्रता पर बड़ा प्रहार बताया है। थरूर ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब किसी एक धर्म की परंपराओं को निशाना बनाया जाता है, तो वह केवल उस समुदाय पर नहीं, बल्कि समूचे भारतीय लोकतंत्र और उसकी ‘आत्मा’ पर हमला होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केरल जैसे राज्यों में सभी समुदायों का सम्मान करना ही वहां की असली पहचान है।
शशि थरूर ने अपने संदेश में महाभारत के उस ऐतिहासिक प्रसंग का स्मरण कराया जब कौरव सभा में द्रौपदी का अपमान हो रहा था और भीष्म-द्रोण जैसे वरिष्ठ जन मौन थे। उन्होंने कहा कि उस अधर्म के खिलाफ पहली आवाज कौरवों के बीच से ही ‘विकर्ण’ ने उठाई थी। इसी संदर्भ में थरूर ने भाजपा को नसीहत देते हुए कहा कि वह सत्ताधारी दल के भीतर से किसी ऐसे साहसी ‘विकर्ण’ की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो आगे आकर अपनी ही पार्टी के लोगों द्वारा किए जा रहे इन हमलों की निंदा करने का साहस दिखाए। उन्होंने चेतावनी दी कि वरिष्ठों का मौन हमेशा अन्याय को बढ़ावा देता है, जो लोकतंत्र के लिए घातक है।
एक ओर जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं दिल्ली के कैथेड्रल चर्च जाकर क्रिसमस की प्रार्थना में भाग लिया, वहीं दूसरी ओर थरूर ने जमीनी स्तर पर हो रहे दुर्व्यवहार और कैरल समूहों पर हमलों की ओर ध्यान आकर्षित किया। थरूर का तर्क है कि प्रधानमंत्री की प्रार्थनाएं तभी सार्थक होंगी जब पार्टी नेतृत्व निचले स्तर पर हो रही हिंसा की कड़े शब्दों में निंदा करेगा। उन्होंने बताया कि वह स्वयं पिछले 17 वर्षों से क्रिसमस पर चर्च जाकर एकजुटता दिखाते रहे हैं। फिलहाल, इन घटनाओं ने देश में सांप्रदायिक सौहार्द और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा पर एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

