संविधान न्याय, समानता, स्वतंत्रता तथा बंधुत्व पर आधारित: राधाकृष्णन

नयी दिल्ली, 24 जून (वार्ता) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने कहा है कि संविधान न्याय, समानता, स्वतंत्रता तथा बंधुत्व पर आधारित समाज की परिकल्पना करता है और इसमें लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब सार्वजनिक पद को विशेषाधिकार के बजाय एक उत्तरदायित्व के रूप में देखा जाता है।

श्री राधाकृष्णन ने बुधवार को यहां ‘आईपी कल्चर इन इंडिया: पावर, प्रिविलेज एंड द डिस्टेंस फ्रॉम डेमोक्रेसी’ नामक पुस्तक का विमोचन किया और कहा कि अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यसभा सांसद नबम रेबिया और सह-लेखक संदीप कुमार द्वारा इस पुस्तक में उठाया गया विषय भारत में लोकतांत्रिक शासन और सार्वजनिक जीवन के मूल को छूता है।

उप राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व पर आधारित समाज की परिकल्पना करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र का सार नागरिकों और सार्वजनिक सत्ता के प्रभारी व्यक्तियों के बीच संबंधों में निहित है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब सार्वजनिक पद को विशेषाधिकार के बजाय एक उत्तरदायित्व के रूप में देखा जाता है।

श्री राधाकृष्णन ने महान तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर का हवाला देते हुए कहा कि सच्चा नेतृत्व सुलभता, करुणा और जवाबदेही से पहचाना जाता है। उन्होंने कहा कि जो नेता जनता के प्रति सुलभ और सम्मानजनक बने रहते हैं, वे स्थायी विश्वास और प्रशंसा अर्जित करते हैं।

उन्होंने कहा कि पुस्तक में जिन विषयों पर चर्चा की गयी है, वे प्रधानमंत्री के उस विजन के अनुरूप हैं, जिसमें वह सार्वजनिक पद को विशेषाधिकार के बजाय सेवा का साधन मानते हैं। प्रधानमंत्री द्वारा विशिष्ट व्यक्तियों के लिए लाल बत्ती समाप्त करने के निर्णय और हाल ही में नीट परीक्षार्थियों को यातायात प्रतिबंधों से होने वाली असुविधा से बचाने के लिए अपने प्रस्थान में विलंब करने के उनके कदम का उल्लेख करते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे कार्य नागरिक-केंद्रित शासन का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं और इस सिद्धांत को सुदृढ़ करते हैं कि सार्वजनिक प्राधिकरण नागरिकों की सेवा के लिए ही अस्तित्व में है। प्रधानमंत्री के शब्दों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “ प्रत्येक भारतीय विशेष है। प्रत्येक भारतीय एक वीआईपी है।”

उन्होंने कहा, “सेवा ही परम धर्म है। ”

उप राष्ट्रपति ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और अन्य विशिष्ट व्यक्तित्वों की सादगी तथा जनसेवा की भावना का उल्लेख करने के लिए पुस्तक की सराहना की। उन्होंने कहा कि लेखकों ने उपनिषदों, रामचरितमानस, भगवान बुद्ध की शिक्षाओं और पंचतंत्र सहित भारत की सभ्यतागत और बौद्धिक परंपराओं के संदर्भों के माध्यम से अपने विश्लेषण को समृद्ध किया है।

इस अवसर पर अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नबम तुकी, मेघालय से राज्यसभा के पूर्व सांसद डब्ल्यूआर खारलुखी और दोनों लेखक उपस्थित थे।

 

 

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