काहिरा, 24 जून (वार्ता) अरब लीग, अफ़्रीकी संघ (एयू) और इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) ने कब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी इलाक़ों में इज़रायल की ज़मीन हड़पने और बस्तियां बसाने की गतिविधियों की निंदा करते हुए प्रस्तावित ई1 बस्ती परियोजना तथा पूर्वी यरूशलम में अल-ख़ान अल-अहमर के बद्दू समुदाय के विस्थापन की ख़ास तौर पर आलोचना की है।
तीनों संगठनों के प्रमुखों ने मंगलवार को जारी एक संयुक्त बयान में कहा कि इज़रायल की बस्तियां बसाने की नीतियां अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के संबंधित प्रस्तावों का गंभीर उल्लंघन हैं। उन्होंने उन कदमों का विरोध दोहराया, जिनसे फिलिस्तीनियों के अधिकारों को नुकसान पहुंचता है और ‘दो-राष्ट्र समाधान’ की संभावनाओं को खतरा पैदा होता है।
बयान में इज़रायल पर फ़िलिस्तीनियों के बुनियादी अधिकारों और आज़ादी का उल्लंघन करने का आरोप भी लगाया गया। इन संगठनों ने इज़रायल की नीतियों को भेदभावपूर्ण बताया। इन तीनों संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से फ़िलिस्तीनियों की सुरक्षा के लिए कानूनी और राजनीतिक कदम उठाने और ज़मीन पर कब्ज़ा करने, लोगों को बेघर करने, नाकेबंदी और बस्तियों के विस्तार जैसी नीतियों को रोकने की अपील की।
तीनों संगठनों ने इजरायली अधिकारियों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों के संचालन पर लगे प्रतिबंधों को तुरंत हटाने और कब्जे वाले क्षेत्रों में कार्यरत संयुक्त राष्ट्र कर्मियों, चिकित्साकर्मियों, पत्रकारों और राहत एजेंसियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इजरायल पर दबाव डालने का भी आग्रह किया कि वह फिलिस्तीनी कर राजस्व जारी करे, जिसे उन्होंने रोक रखा है। उनका तर्क है कि यह धन फिलिस्तीनी सरकार के लिए सार्वजनिक सेवाओं को बनाये रखने और फिलिस्तीनी आबादी का समर्थन करने के लिए जरूरी है।
यह बयान अरब लीग के महासचिव अहमद अबुल घीत, अफ्रीकी संघ आयोग के अध्यक्ष महमूद अली यूसुफ और ओआईसी के महासचिव हिसैन इब्राहिम ताहा ने जारी किया।
