​फिर रूठा मानसून,हफ़्ते भर से बारिश न होने से किसान मायूस, उमस ने बढ़ाई आमजन की बेचैनी

सौसर, जुलाई के महीने में जहाँ चारों ओर झमाझम बारिश का दौर होना चाहिए,वहीं क्षेत्र में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने हर किसी को चिंता में डाल दिया है। पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र में बारिश पूरी तरह से गायब है, जिससे अब खरीफ की फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। कड़क धूप और बारिश की गैप के कारण खेतों में खड़ी फसलों की ग्रोथ थम सी गई है, जिसे देखकर अन्नदाता के माथे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट दिखाई दे रही हैं।

 

*​फसलों की रुकी ग्रोथ, मौसम की अनिश्चितता से बढ़ी चिंता -*

 

​इस साल शुरुआत से ही मानसून की बेरुखी के बाद हुई बारिश से किसानों ने बड़े उत्साह के साथ बुआई का काम पूरा किया था। उम्मीद थी कि इस बार अच्छी पैदावार होगी, लेकिन जुलाई के मध्य में आकर मानसून के इस तरह रूठ जाने से कृषि क्षेत्र को बड़ा झटका लगा है। कृषि विशेषज्ञों और किसानों का कहना है कि यह समय फसलों के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन पानी न मिलने से पौधे सूखने की कगार पर पहुँच रहे हैं। जुलाई के महीने में मौसम का यह अप्रत्याशित रूप आने वाले समय में मौसम की अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन के बड़े खतरों की ओर इशारा कर रहा है।

 

*​भीषण उमस से बेहाल लोग, अस्पतालों में बढ़ रही मरीजों की संख्या -*

 

​एक तरफ जहाँ किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं, वहीं दूसरी ओर आम जनता भी मौसम के इस बदले मिजाज से त्रस्त है। तेज धूप और हवा में नमी के कारण क्षेत्र में बेचैनी बढ़ाने वाली उमस का प्रकोप भारी रूप से बढ़ गया है। दिनभर पसीने से तरबतर कर देने वाली इस उमस और रात के गर्म माहौल का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। अचानक बदले इस मौसम के कारण मौसमी बीमारियों ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। डॉक्टरों के अनुसार, इस समय सर्दी, खाँसी, बुखार और पेट से संबंधित समस्याओं के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। बहरहाल क्षेत्र के किसानों और आम नागरिकों को अब केवल एक ही उम्मीद है कि मानसून जल्द ही दोबारा सक्रिय हो और क्षेत्र को इस सूखे व बेचैनी भरी उमस से राहत मिले।

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