अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिनों के समझौते के रोडमैप पर बनी सहमति

तेहरान, 22 जून (वार्ता) ईरान-अमेरिका ने उच्च स्तरीय वार्ता का पहला दौर पूरा कर लिया है और दोनों देश स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक शहर में चल रही वार्ता में अंतिम समझौते की दिशा में 60 दिनों के रोडमैप पर सहमत हो गये हैं। दोनों पक्ष ‘इस्लामाबाद समझौता पत्र’ (एमओयू) के तहत तकनीकी मुद्दों पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए एक प्रणाली विकसित करने पर भी राजी हो गये हैं। मध्यस्थ देश कतर-पाकिस्तान के जारी संयुक्त बयान के अनुसार, पहले दिन की ‘सकारात्मक और रचनात्मक’ बातचीत के नतीजे उत्साहवर्धक रहे। चर्चा आगे बढ़ाने के लिए एक सिस्टम तैयार कर लिया गया है।
समझौता पत्र के तहत, दोनों पक्ष एक ‘उच्च समिति’ स्थापित करने पर सहमत हुए हैं, जो मध्यस्थता प्रक्रिया की राजनीतिक निगरानी के लिए जिम्मेदार होगी।

वरिष्ठ वार्ताकार नियमित रूप से इस समिति को रिपोर्ट करेंगे। यह समिति परमाणु मुद्दों, प्रतिबंधों और एक निगरानी व विवाद-समाधान तंत्र पर केंद्रित कार्य समूहों की देखरेख करेगी, ताकि समझौता पत्र के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित किया जा सके और अन्य लंबित मुद्दों को सुलझाया जा सके।
संयुक्त बयान में कहा गया है कि उच्च समिति ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर पहुंचने के उद्देश्य से एक खाके को मंजूरी दे दी है। इससे अतिरिक्त तकनीकी मुद्दों पर बातचीत तुरंत शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। समझौते के तहत दोनों पक्षों के बीच बातचीत का सीधा जरिया भी तैयार किया गया है, जो समझौता पत्र के अनुच्छेद पांच में तय की गयी अवधि तक जारी रहेगा।

इसका मकसद किसी भी तरह के टकराव और गलतफहमी को रोकना है, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहे। बयान में दोनों पक्षों और लेबनान को शामिल कर एक ‘संघर्ष नियंत्रण इकाई’ के गठन की घोषणा की गयी, जिसमें मध्यस्थ सहयोग करेंगे। इसका उद्देश्य समझौता ज्ञापन के प्रावधानों के अनुसार लेबनान में सैन्य अभियानों पर रोक को अमल कराना है।
सभी मुद्दों पर तकनीकी चर्चा सप्ताहांत तक बर्गनस्टॉक परिसर में जारी रहने वाली है। कतर और पाकिस्तान ने कहा कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए काम करना जारी रखेंगे कि बातचीत रचनात्मक माहौल में आगे बढ़े और अंतिम समझौते तक पहुंचे।

दोनों मध्यस्थों ने कूटनीति तथा संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता के लिए ईरान-अमेरिका की सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने इस जारी प्रक्रिया का समर्थन करने के लिए अपने सहयोगियों और साझेदारों को धन्यवाद दिया। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इन वार्ताओं के परिणामों की रूपरेखा सामने रखी। कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई इस वार्ता का उद्देश्य इस वर्ष की शुरुआत में अमेरिका-इजरायल के ईरान के खिलाफ शुरू किये गये युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करना है। श्री अराघची ने सोमवार सुबह ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें एक दिन पहले स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक में आयोजित वार्ता के पहले दौर के बाद पाकिस्तान और कतर के जारी संयुक्त बयान की एक तस्वीर भी शामिल थी। वे संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालीबाफ के नेतृत्व वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, जिसमें कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इस बातचीत का उद्देश्य कुछ दिन पहले ईरानी और अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षरित एमओयू के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना था। इस समझौता ज्ञापन में लेबनान सहित सभी मोर्चों पर शत्रुता को समाप्त करने का आह्वान किया गया है।
श्री अराघची ने लिखा, “पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता ने लेबनान युद्ध को समाप्त करने की दिशा में बड़ी प्रगति की है। तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात को छूट दे दी गयी है, नाकेबंदी हटा ली गयी है, कुछ फ्रीज संपत्तियों को मुक्त कर दिया गया है और ईरान के लिए एक बड़ी पुनर्निर्माण व विकास योजना शुरू की गयी है। पहली वास्तविक परीक्षा ‘लेबनान संघर्ष-मुक्त सेल’ है।” वे ईरान पर लगायी गयी अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी और एक पुनर्निर्माण व विकास योजना का जिक्र कर रहे थे, जिसका उद्देश्य इस आक्रामक युद्ध के दौरान अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों से हुए नुकसान की भरपाई करना है।

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