नयी दिल्ली, 21 जून (वार्ता) अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर रविवार को देश और दुनिया में योग के प्रति लोगों को जागरूक बनाने के लिये अनेक कार्यक्रम आयोजित किये गये। दुनियाभर में लगभग 2,500 जगहों पर 210 से ज्यादा भारतीय मिशनों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन किया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बारहवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जबलपुर में आयोजित सामूहिक योग कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए पूरे विश्व के योग साधकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज हम भारत की उस महान परंपरा का उत्सव मना रहे हैं, जिसने मानवता को स्वस्थ, संतुलित और सार्थक जीवन का मार्ग दिखाया है। योग विश्व-समुदाय को हमारी सांस्कृतिक धरोहर की ओर से मिला एक अमूल्य उपहार है। राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2014 में, भारत की पहल पर, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रतिवर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। उस घोषणा से विश्व-कल्याण के एक सशक्त माध्यम के रूप में योग पद्धति की पहचान और भी मजबूत हुई है। आज विश्व के अनेक देशों में करोड़ों लोग योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ समाज के वरिष्ठ सदस्यों के स्वस्थ, सक्रिय, आत्मनिर्भर एवं गरिमापूर्ण जीवन के लिए योग की उपयोगिता को अभिव्यक्त करती है। आज हम जो जीवनशैली अपनाते हैं, वही हमारे आने वाले समय के स्वास्थ्य और सुख का आधार बनती है। योग बढ़ती आयु में भी व्यक्ति के सक्रिय और आत्मनिर्भर बने रहने में सहायक होता है। इसके साथ ही, मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन भी प्रदान करता है।
उप राष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने बारहवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर लेह, लद्दाख के स्पितुक स्टेडियम में योगाभ्यास समारोह में भाग लिया। उन्होंने लोगों से योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील करते हुए कहा है कि यह व्यक्ति के स्वास्थ्य, कल्याण और चरित्र के लिए आजीवन निवेश है। श्री राधाकृष्णन ने इस अवसर पर सभी को योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाने तथा दूसरों को भी इसके परिवर्तनकारी लाभों को अपनाने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि योग एक अधिक स्वस्थ, अधिक सुखी और अधिक सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण में सहायक है तथा यह व्यक्ति के स्वास्थ्य, कल्याण और चरित्र के लिए आजीवन निवेश है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोलकाता में रेड रोड पर आयोजित मुख्य योग कार्यक्रम में शामिल होते हुए कहा, “ हम हेल्दी एजिंग (उम्र बढ़ने के साथ सेहतमंद रहने) के लिए योग की बात करते हैं, तो इसका मतलब है कि हम यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर सकते हैं कि उम्र बढ़ने से इंसान की क्षमता कम न हो। योग इंसान को लगातार आगे बढ़ने और विकास करने में मदद कर सके। योग हमारे शरीर को लचीला बनाने में मदद करता है। यह हमारी ऊर्जा स्तर को बनाये रखता है। यह हमें शांत और तनाव-मुक्त जीवन जीने में भी मदद करता है। नियमित अभ्यास से योग हमें जीवन भर अपने शरीर और मन को समझने और सीखने वाला बनाता है। हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि 40 की उम्र में हम 20 की आयु की तुलना में ज्यादा लचीले हों। हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि 50 की उम्र में हम 30 की उम्र की तुलना में ज्यादा ऊर्जावान हों।”
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद भवन में सांसदों के साथ योगाभ्यास का नेतृत्व किया। इस अवसर पर सभी को शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि यह दिवस भारत की उस शाश्वत सभ्यतागत विरासत का उत्सव है, जिसने मानवता को स्वास्थ्य, संतुलन और आंतरिक शांति का मार्ग प्रदान किया है। उन्होंने कहा, “ योग केवल शरीर को नहीं, विचारों को भी संतुलित करता है। संसद में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन योग हमें संवाद और संयम का मार्ग दिखाता है।”
श्री बिरला ने योग के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के ऋषियों-मनीषियों ने सदियों तक योग परंपरा के संरक्षण के लिए प्रयास किये और इसे जीवन जीने की पद्धति के रूप में स्थापित किया। इसका उद्देश्य शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और मानव चेतना का जागरण था। उन्होंने कहा कि आज योग एक वैश्विक जनआंदोलन बन चुका है और दुनिया इसे अपना रही है, पर यह भारत की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान-परंपरा का उपहार है। लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि आधुनिक जीवन तनाव, असंतुलन और अनिश्चितताओं से घिरा है। ऐसे समय में योग मानसिक शांति, धैर्य, भावनात्मक संतुलन और अनुशासित जीवनशैली बनाये रखने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि इक्कीसवीं सदी की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक मानसिक तनाव है, योग इसका सुलभ, वैज्ञानिक और समावेशी समाधान प्रस्तुत करता है। आज की डिजिटल पीढ़ी को स्क्रीन टाइम और स्ट्रेस के बीच संतुलन बनाने के लिए योग को जीवनशैली बनाना होगा। योग केवल फिटनेस का कार्यक्रम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, चरित्र और चेतना के विकास का माध्यम है। दैनिक जीवन में योग अपनाने से व्यक्ति अधिक संतुलित और बेहतर निर्णय लेने में सक्षम होता है तथा उसके समग्र स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। उन्होंने कहा, “ स्वस्थ नागरिक ही मजबूत लोकतंत्र की सबसे बड़ी पूंजी हैं।” यदि देश के 140 करोड़ नागरिक प्रतिदिन कुछ मिनट योग के लिए निकालें, तो यह भारत की सबसे बड़ी जन-स्वास्थ्य क्रांति बन सकती है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर रविवार को मेघालय के शिलांग स्थित पूर्वी वायु कमान मुख्यालय में भारतीय वायु सेना और भारतीय सेना के लगभग एक हजार सैनिकों के साथ योगाभ्यास किया। रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में योग को वैश्विक जन आंदोलन बनाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निरंतर प्रयासों और दूरदर्शी नेतृत्व को दिया, जिससे विश्वभर के लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिल रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि योग भारत की प्राचीन परंपराओं की शक्ति का प्रतीक है, जो संपूर्ण मानवता के कल्याण को सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने लोगों से स्वस्थ शरीर, शांत मन और सशक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने की अपील की। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने आयुष मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में रांची विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती दीक्षांत मंडप में योग दिवस मनाया। उन्होंने भी दैनिक जीवन में योग को शामिल करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यह अनुकूल अथवा प्रतिकूल परिस्थितियों में शांत रहने की शिक्षा देता है। उन्होंने इसे सकारात्मकता को बढ़ावा देने का सबसे सशक्त माध्यम बताया।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने के लिए प्रधानमंत्री प्रयासों की सराहना करते हुए इसे मानवता के प्रति एक उल्लेखनीय सेवा बताया। उन्होंने कहा कि विश्वभर में योग को मिली व्यापक स्वीकृति तथा संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को मान्यता दिया जाना योग के सार्वभौमिक आकर्षण और महत्व का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि योग किसी एक देश या संस्कृति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मानवता के कल्याण के लिए एक साझा वैश्विक अभ्यास के रूप में निरंतर आगे बढ़ना चाहिए। सभी नागरिकों से योग को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह अधिक स्वस्थ, संतुलित और अधिक जागरूक जीवनशैली अपनाने की याद दिलाता है।
तेलंगाना में रविवार को बारहवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया, जिसमें जनप्रतिनिधियों, युवाओं, छात्रों और योग साधकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आंध प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर यहां आयोजित मुख्य समारोह से ‘योगमय राष्ट्र व योगमय विश्व के आह्वान’ के बीच मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने राज्य की जनता को नशाखोरी के विरुद्ध शपथ दिलायी और योग गुरु स्वामी रामदेव के परामर्श के साथ प्राणायाम को राज्य में जनांदोलन बना कर घर-घर पहुंचाने के संकल्प की घोषणा की। कार्यक्रम विजयवाड़ा के म्युनिसिपल स्टेडियम में रखा गया था और पूरा स्टेडियम भरा था। योग-प्राणायाम की अमोल भारतीय सनातन विरासत से देश के लोगाें को फिर जोड़ने में तीन दशक से अनवरत लगे स्वामी रामदेव के निर्देशन में लगभग हजारों की संख्या में लोगों ने लगभग तीन घंटे विभिन्न प्रकार के योगासन और प्राणायाम की क्रियायें की। यह कार्यक्रम योगपीठ तथा आंध्र प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें पतंजलि पीठ के स्वामी आचार्य बालकृष्ण भी उपस्थित थे। इस वर्ष योग दिवस की थीम ‘स्वस्थ वृद्वावस्था के लिए योग’ रखी गयी थी। उपस्थित विशिष्ट लोगों में केंद्रीय नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू और सत्तारूढ़ तेलुगू देशम पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नारा लोकेश भी शामिल थे। इन दोनों नेताओं ने लोगों के बीच जाकर योगासन और प्राणायाम किये। अंतरराष्ट्रीय योग-दिवस का उत्सव मनाने के लिए लोग वहां प्रात: चार बजे से ही उपस्थित होने लगे थे और पांच बजे तक स्टेडियम पूरा भर गया था। पतंजलि योगपीठ के प्रमुख स्वामी रामदेव ने ‘करो योग, रहो निरोग’ के उद्घोषणा के साथ लोगों को शारीरिक व्याधि और विकारों में योगासनों और प्राणायाम की क्रियाओं के लाभ बताते हुए उनके अभ्यास का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा, “ योग पूरे विश्व के लिए हमारे पूज्य ऋषियों का अवदान, योगदान, विरासत एवं विज्ञान है।”
उन्होंने योग को मानवता के लिए मुफ्त में उपलब्ध अमोल भेंट बताते हुए कहा कि योग सबके लिए है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप से श्री नायडू ने कहा कि वह स्वयं तीन दशक से योग और प्राणायाम को नियमित अभ्यास करते हैं और इससे उन्हें अपने काम से जुड़े दैनिक तनाव से निपटने की शक्ति मिलती है। उन्होंने कहा, “ हमारा लक्ष्य आंध्र प्रदेश को केवल टेक्नोलॉजी हब बनाना ही नहीं, अपितु आध्यात्मिक एवं वेलनेस केंद्र बनाना भी है। इसमें योग को जनांदोलन बनाकर राज्य के हर घर तक पहुंचाने का भी लक्ष्य भी शामिल है। इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण द्वारा रचित पुस्तक “योगर्षियोगनिघण्टु:” तथा आयुष मंत्रालय आंध्र प्रदेश द्वारा जारी पुस्तक आयुष आरोग्य सूत्रावली का विमोचन किया। स्वामी रामदेव और श्री नायडू ने इस अवसर पर श्री मोदी के नेतृत्व की सराहना की और कहा कि उनके नेतृत्व में ही भारत के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ। आज लगभग 200 देश एक साथ योगाभ्यास कर योग की स्वीकार्यता को चरितार्थ करते हैं।
भारतीय सेना ने बारहवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर देश भर में अलग-अलग स्थानों पर पर योगाभ्यास कर समग्र स्वास्थ्य, मानसिक दृढ़ता और अनुशासित जीवन के प्रति प्रतिबद्धता दोहरायी। हिमालय की उच्च हिमालयी सीमाओं से लेकर मरुस्थलीय, तटीय, द्वीपीय और क्षेत्रीय सैन्य संरचनाओं तक, सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों, परिवारजनों, एनसीसी कैडेटों और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक योगाभ्यास में भाग लिया।
इस वर्ष की थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ सेना के शारीरिक दक्षता, आंतरिक संतुलन और आजीवन कल्याण के मूल्यों के साथ गहराई से जुड़ी रही। समारोहों में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के शाश्वत भारतीय दर्शन को भी प्रमुखता दी गयी, जो भारत की विश्व को दी गयी स्थायी देन के रूप में योग की सार्वभौमिक स्वीकार्यता को रेखांकित करता है। सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने असम के तेजपुर में योग कार्यक्रम का नेतृत्व किया। पूर्वी क्षेत्र में सैनिकों के साथ उनकी सहभागिता ने सभी प्रकार के भूभागों और परिस्थितियों में सेना द्वारा शारीरिक क्षमता, दृढ़ता और परिचालन तत्परता पर दिये जा रहे निरंतर बल का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर मैदान में बारहवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह का नेतृत्व किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि योग शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम है और स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि योग निरंतर व्यक्तियों को शारीरिक कल्याण, मानसिक शांति और समग्र विकास की ओर मार्गदर्शन करता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के प्रयासों के फलस्वरूप योग वैश्विक स्तर पर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्वस्थ जीवनशैली का प्रतीक बन गया है, जो दुनिया भर के लोगों को स्वास्थ्य, संतुलन और कल्याण की ओर प्रेरित कर रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सभी नागरिकों को शुभकामनाएं भी दीं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कर्तव्य भवन में एक विशेष योग सत्र का भी आयोजन किया, जिसका नेतृत्व केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम में मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा अपने दैनिक जीवन में योग को अपनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के साथ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बीकानेर के करणी सिंह स्टेडियम में आयोजित एक सामूहिक योग सत्र में भाग लिया और स्वस्थ जीवन शैली तथा योग के महत्व का संदेश दिया। श्री वैष्णव ने कहा कि योग भारत की प्राचीन और अमूल्य विरासत है, जिसे प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में अब पूरा विश्व अपना रहा है। उन्होंने कहा कि योग का नियमित अभ्यास न केवल शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार करता है, बल्कि मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और तनावमुक्त जीवन को भी बढ़ावा देता है। उन्होंने लोगों से योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने और स्वस्थ रहने का आग्रह किया। श्री मेघवाल ने इस अवसर पर कहा कि योग भारतीय संस्कृति और जीवन दर्शन का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि एक मजबूत समाज और विकसित राष्ट्र का निर्माण केवल स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन के माध्यम से ही हो सकता है। योग अनुशासन, आत्म-संयम और संतुलन सिखाता है, इसलिए प्रत्येक नागरिक को इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। इस मौके पर करणी स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली छात्र, युवा, महिलाएं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी शामिल हुए। प्रतिभागियों ने योग प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया।
राज्यों की राजधानी और अन्य स्थानों पर भी योगाभ्यास के अनेक कार्यक्रम आयोजित किये गये जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

