अमेरिका- ईरान के बीच 4 महीने से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए स्विट्जरलैंड में रविवार को निर्णायक बैठक होने जा रही है। इसमें पाकिस्तान और कतर भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव और युद्ध के बादलों के बीच अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि रविवार को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में एक उच्च स्तरीय बैठक के लिए एक मंच पर आ रहे हैं। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य उस युद्धविराम समझौते की बारीकियों को अंतिम रूप देना है, जिस पर इस सप्ताह बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने हस्ताक्षर किए थे।
पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता
इस कूटनीतिक पहल में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में उभर कर सामने आया है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर इस बातचीत में हिस्सा लेने के लिए स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं।
यह वार्ता ‘इस्लामाबाद MoU पर हस्ताक्षर के बाद की अगली प्रक्रिया का हिस्सा है। पाकिस्तान के साथ-साथ कतर के मध्यस्थ भी इस तकनीकी स्तर की बातचीत में शामिल होंगे, ताकि पिछले चार महीनों से चल रहे संघर्ष को स्थायी रूप से रोका जा सके।
जेडी वेंस और कुशनर की टीम संभाल रही कमान
अमेरिका की ओर से इस बातचीत का नेतृत्व नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप के मुख्य वार्ताकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ पहले से ही स्विट्जरलैंड में मौजूद हैं और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी तकनीकी बारीकियों पर काम कर रहे हैं। वहीं, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकेई ने स्पष्ट किया है कि ईरानी टीम तभी समझौते को सफल मानेगी जब उसे विश्वास होगा कि अमेरिका अपनी शर्तों का पूरी तरह पालन कर रहा है।
शांति की राह आसान नहीं
शांति की राह इतनी आसान नहीं दिख रही है। ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, उनकी टीम वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड पहुंच तो रही है, लेकिन संदेह के बादल बरकरार हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकेई ने स्पष्ट किया है कि जब तक ईरान को यह विश्वास नहीं होता कि अमेरिका ईमानदारी से समझौते का पालन करेगा, तब तक प्रगति की संभावना कम है।
क्यों जरूरी है यह समझौता?
यदि स्विट्जरलैंड में हो रही यह वार्ता सफल रहती है, तो न केवल होर्मुज जलमार्ग जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्ते सुरक्षित होंगे, बल्कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी स्थिरता आने की उम्मीद है।
