यहां से मिले स्नेह, विश्वास और अपनत्व को अपने हृदय में संजोकर ले जा रहा हूं: जस्टिस सचदेवा

जबलपुर। न्यायिक जीवन के एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर जब हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद से सुप्रीम कोर्ट के लिए विदा हो रहे न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा मंच पर पहुंचे, तो यह केवल एक औपचारिक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि बार और बेंच के बीच बने आत्मीय रिश्तों का भावनात्मक उत्सव बन गया।

हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित समारोह में जस्टिस सचदेवा ने कहा कि वह जबलपुर से कोई भौतिक उपलब्धि लेकर नहीं जा रहे, बल्कि यहां से मिले स्नेह, विश्वास और अपनत्व को अपने हृदय में संजोकर ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दो वर्ष पूर्व जब उनका तबादला जबलपुर हुआ था, तब मन में अनेक जिज्ञासाएं और आशंकाएं थीं, किंतु संस्कारधानी ने उन्हें कोई परेशानी नहीं होने दी। राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा ने कहा कि यह दुर्लभ अवसर है जब उन्हें अल्प अवधि में दूसरी बार जस्टिस सचदेवा के सम्मान कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला। उन्होंने इसे न्यायपालिका की उस परंपरा का प्रतीक बताया, जिसमें प्रतिभा, परिश्रम और निष्पक्षता को सर्वोच्च सम्मान मिलता है। समारोह के दौरान बार एसोसिएशन की ओर से अध्यक्ष संजय अग्रवाल, सचिव निखिल तिवारी तथा अन्य पदाधिकारियों ने जस्टिस सचदेवा का सम्मान किया।

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