शाह ने अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन का उद्घाटन किया, अभिज्ञान ऐप का भी लोकार्पण

नयी दिल्ली 19 जून (वार्ता) केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को यहां 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन का उद्घाटन किया और राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अभिज्ञान सहित तीन एप्लीकेशन का लोकार्पण किया।

कार्यक्रम में निदेशक खूफिया ब्यूरो , निदेशक एनसीआरबी और निदेशक केन्द्रीय फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

श्री शाह ने बाद में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा ,” आज एनसीआरबी का ‘अभिज्ञान’ मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया। 1.3 करोड़ फिंगरप्रिंट के डेटाबेस का यह पोर्टेबल वर्जन ऑन-फील्ड पुलिस कर्मियों को सीधे उनके स्मार्टफोन पर अपराधियों के विशाल डेटाबेस तक पहुँचने की शक्ति देता है। टू-स्टेप ऑथेंटिकेशन से सुरक्षित यह ऐप चंद सेकंड में रियल-टाइम फिंगरप्रिंट पहचान कर ग्राउंड पुलिसिंग को और सशक्त बना रहा है। फास्टआईडी, पोर्टेबल सेटअप और करोड़ों रिकॉर्ड जैसी खूबियों से युक्त ऐप एक बेहद शक्तिशाली टूल है।”

श्री शाह ने कहा कि सरकार ने अगस्त 2019 से आपराधिक कानूनों में आमूलचूल परिवर्तन का एक व्यापक अभियान शुरू किया है। उन्होंने कहा , “हमारा प्रयास आपराधिक न्याय व्यवस्था को समयानुकूल बनाने के साथ ही आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी को उसका महत्वपूर्ण अंग बनाना है। प्राथमिकी से दोषसिद्धी तक 3 साल के भीतर न्याय सुनिश्चित करना सरकार के आपराधिक न्याय सुधार का प्रमुख उद्देश्य है। पिछले सात वर्षों की यात्रा में हम एक महत्वपूर्ण लक्ष्य को पूरा करने के अत्यंत निकट पहुंच गये हैं।”

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नये आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उन्होंने देश के 24 राज्यों के मुख्यमंत्रियों और गृह मंत्रियों के साथ विस्तृत बैठकें की हैं। उन्होंने कहा कि एनसीआरबी सूचना संग्रह से लेकर अपराध सिद्ध करने तक की पूरी यात्रा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग बन चुका है। इसी प्रयास का परिणाम है कि नयी न्याय संहिताएं के लागू होने के बाद देश के हर थाने में नये कानून सुचारू रूप से कार्यान्वित हो रहे हैं। यह एक बहुत बड़ी साझा उपलब्धि है।

श्री शाह ने कहा कि अपराध के विरुद्ध लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार वैज्ञानिक साक्ष्य है। यदि अपराध स्थल से वैज्ञानिक साक्ष्यों को शुरुआत से ही संरक्षित किया जाए तो अपराधी को सजा दिलाने में इससे बेहतर साधन और कोई नहीं हो सकता। फिंगरप्रिंट वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करने का अत्यंत महत्वपूर्ण माध्यम है। फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड का संग्रहण और प्रभावी उपयोग इसका सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है।

गृह मंत्री ने कहा , “हमारा लक्ष्य स्पष्ट है, अपराधी कितना भी चतुर हो, वह कानून और विज्ञान की संयुक्त शक्ति से बच नहीं सकता। वैज्ञानिक जांच, समयबद्ध अभियोजन और एकीकृत आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रभावी उपयोग के माध्यम से हम अपराध नियंत्रण सुनिश्चित करेंगे।” उन्होंने कहा, केवल अपराधी को पकड़ने से अपराध नियंत्रित नहीं होता। जब अपराध करने के बाद निश्चित रूप से दंड मिलने का भाव समाज में स्थापित हो जाएगा, तभी अपराधों को रोकने में वास्तविक सफलता मिलेगी और बहुत बड़ी संख्या में लोग अपराधी बनने से खुद ही रुक जाएंगे ।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अपराधी को पकड़ने के साथ-साथ अपराध को समयबद्ध तरीके से सिद्ध करने पर हमारा निरंतर जोर रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारा जोर केवल अपराधी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि अपराध को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध करना और समय पर न्याय सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।” उन्होंने कहा कि आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। पूरे देश में पुलिस, जेल प्रशासन, अभियोजन एजेंसियां, अदालतें और फॉरेंसिक प्रयोगशालाएं — आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े सभी अंगों ने इन सुधारों को न केवल स्वीकार किया है, बल्कि उन्हें आगे भी बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि अब हमारा दायित्व है हम इन सुधारों की सफलताओं को आम जनता तक पहुंचाएं।

श्री शाह ने कहा कि अभी हमारे पास 1 करोड़ 29 लाख फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड, लगभग 9 लाख 91 हजार नारकोटिक अपराधियों का रिकॉर्ड, 3 लाख 65 हजार मानव तस्करी के मामलों का रिकॉर्ड और जेल डेटाबेस उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि अब आवश्यकता है कि पूरी आपराधिक न्याय व्यवस्था को इस शक्ति से परिचित कराया जाए और इस डेटा को वास्तविक ताकत में परिवर्तित किया जाए।

उन्होंने कहा कि चार वर्ष पहले एनसीआरबी में ‘मॉडस ऑपरेंडी ब्यूरो’ की शुरुआत की गई थी। आज के सम्मेलन के बाद यह ब्यूरो डेटा के उपयोग की पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। इसके माध्यम से हम न केवल अपराधियों को सजा दिलाने में सफल होंगे, बल्कि अपराध घटित होने से पहले ही उसे रोकने में भी सक्षम होंगे।

 

 

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