विधायक निर्मला सप्रे ने कहा कि नहीं छोड़ी है कांग्रेस, फैसला सुरक्षित

जबलपुर। बीना से विधायक निर्मला सप्रे की तरफ से हाईकोर्ट में कहा गया कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी नहीं छोड़ी है। वह कांग्रेस में थी, है और रहेंगी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की तरफ से कहा गया कि वह कांग्रेस में थी, हैं और रहेंगी। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने उनके बयान को रिकॉर्ड में लेते हुए याचिका पर निर्णय सुरक्षित रखने के आदेश जारी किये।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की तरफ से हाईकोर्ट में दल-बदल कानून के तहत बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे का निर्वाचन शून्य घोषित किये जाने की मांग की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि विधायक निर्मला सप्रे ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त थी। लोकसभा चुनाव के दौरान पांच मई 2024 को राहतगढ़ में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के कार्यक्रम में मंच पर पहुंची थीं। कांग्रेस विधायक सप्रे भाजपा में शामिल हो चुकी हैं, इसके बावजूद उन्होंने विधायक पद से त्यागपत्र नहीं दिया है। दलबदल कानून के प्रकाश में उनका यह रवैया गैर कानूनी है। इसलिए सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए।

याचिका में कहा गया था कि विधायक सप्रे की सदस्य समाप्त किये जाने की संबंध में उन्होने 30 जून 2024 को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दायर की थी। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार विधानसभा अध्यक्ष को 90 दिनों में सुनवाई पूर्ण कर आदेश जारी करना था। याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका प्रस्तुत करे दो साल से अधिक का समय गुजर गया है। जिसके कारण उक्त याचिका हाईकोर्ट में दायर की गयी है।

याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में उक्त जानकारी पेश की गयी। सरकार की तरफ से बताया गया कि विधायक सप्रे को भाजपा ने सदस्यता प्रदान नहीं की है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किये है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल तथा सरकार की तरफ से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने पैरवी की।

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